मौके पर 20.97 करोड़ रुपये की वसूली, विद्युत विभाग ने 34,130 और राजस्व विभाग ने 31,329 मामलों का किया निस्तारण
बलिया। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर बलिया में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का उद्घाटन माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति एवं बलिया के प्रशासनिक न्यायमूर्ति (सेशन डिवीजन) डॉ. गौतम चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश बलिया श्री अनिल कुमार झा, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री अश्वनी कुमार दूबे, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी श्री संजीव कुमार तिवारी, नोडल अधिकारी लोक अदालत श्री प्रथम कान्त, जिलाधिकारी श्री मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ओम वीर सिंह, क्रिमिनल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र कुमार मिश्र तथा सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री जीतेन्द्र बहादुर सिंह सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक प्रबंधक, कर्मचारी, पीएलवी एवं वादकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट)/नोडल अधिकारी लोक अदालत श्री प्रथम कान्त तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री चन्द्र प्रकाश तिवारी ने किया।
सुलह-समझौते से विवादों के निस्तारण पर जोर
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विवादों का सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण करने पर जोर दिया तथा मध्यस्थता के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को समय का सदुपयोग करते हुए लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण के लिए प्रेरित किया।
जनपद न्यायाधीश श्री अनिल कुमार झा ने न्याय को सरल, सुलभ और मानवीय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक उत्थान भी है और लोक अदालत का आम नागरिक के जीवन पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
न्यायालयों में हजारों मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी एवं फौजदारी न्यायालयों द्वारा कुल 2,166 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें फौजदारी मामलों में अर्थदंड के रूप में 5,37,960 रुपये, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के माध्यम से 1,40,85,624.44 रुपये तथा समझौता धनराशि के रूप में 3,10,000 रुपये शामिल हैं।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 92 फौजदारी वाद एवं 429 चालान मामलों का निस्तारण किया गया। सिविल जज (सीडि.) द्वारा 161 फौजदारी, 17 चालान तथा 19 सिविल वाद निस्तारित किए गए और 1,22,19,963.44 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया गया। विभिन्न न्यायालयों में बड़ी संख्या में फौजदारी, सिविल, वैवाहिक एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों का निस्तारण किया गया।
परिवार न्यायालय में 54 वैवाहिक वाद निस्तारित
परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश श्री अश्वनी कुमार दूबे द्वारा 13 वैवाहिक वाद तथा अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश श्री कमला पति द्वारा 41 वैवाहिक वाद, कुल 54 वैवाहिक मामलों का निस्तारण किया गया।
मोटर दुर्घटना के 25 मामलों में 1.43 करोड़ का प्रतिकर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी श्री संजीव कुमार तिवारी द्वारा 25 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ित पक्षों को कुल 1,43,20,000 रुपये प्रतिकर दिलाया गया।
राजस्व विभाग ने 31,329 और विद्युत विभाग ने 34,130 मामले निपटाए
राष्ट्रीय लोक अदालत में राजस्व विभाग द्वारा 31,329 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं विद्युत विभाग ने 34,130 मामलों का निस्तारण करते हुए 17,68,91,000 रुपये की समझौता धनराशि निर्धारित की।
उपभोक्ता फोरम द्वारा 8 वादों का निस्तारण किया गया, जिसमें 2,72,202 रुपये की प्रतिकर धनराशि शामिल रही। दूरसंचार विभाग ने 10 प्री-लिटिगेशन वादों का निस्तारण किया, जिनमें 58,610 रुपये की समझौता धनराशि रही और मौके पर 21,000 रुपये की वसूली हुई।
बैंकों के 934 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण
विभिन्न बैंकों द्वारा कुल 934 प्री-लिटिगेशन वादों का निस्तारण किया गया। इनमें कुल 6,45,04,206 रुपये की समझौता धनराशि तय हुई, जबकि मौके पर ही 3,22,77,614 रुपये की नकद वसूली की गई।
कुल 68,656 मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत में सिविल, फौजदारी, राजस्व, बैंक, विद्युत, दूरसंचार एवं अन्य विभागों से संबंधित कुल 68,656 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 27,04,41,642 रुपये (27 करोड़ 4 लाख 41 हजार 642 रुपये) की समझौता धनराशि तय हुई। वहीं मौके पर ही कुल 20,97,27,574 रुपये (20 करोड़ 97 लाख 27 हजार 574 रुपये) की वसूली की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन से बड़ी संख्या में लंबित विवादों का त्वरित एवं सुलह-समझौते के आधार पर समाधान हुआ, जिससे वादकारियों को समय और धन दोनों की बचत हुई।




