ओम प्रकाश वर्मा
नगरा (बलिया)। आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को पूरे क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, आस्था और भारतीय संस्कृति के गौरवशाली मूल्यों के साथ मनाई गई। मंदिरों, आश्रमों, शिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न धार्मिक स्थलों पर गुरुजनों का विधि-विधान से पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर ज्ञान, संस्कार, सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे दिन धार्मिक आयोजनों, प्रवचनों और पूजन कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा। गुरुजनों ने जीवन में शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। शास्त्रों में वर्णित गुरु-शिष्य परंपरा आज भी समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रही है। कार्यक्रमों में महर्षि वेदव्यास का स्मरण करते हुए उनके योगदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और परंपरा के प्रति समर्पण का महान उत्सव है। इस अवसर पर संत शिरोमणि रविदास जयंती भी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। विभिन्न स्थानों पर संत रविदास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास ने सामाजिक समरसता, समानता, मानवता और भक्ति का संदेश देकर समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने ऊंच-नीच, भेदभाव और जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर प्रेम, भाईचारे और समान अधिकारों पर आधारित समाज की स्थापना का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। कार्यक्रमों में उपस्थित लोगों ने गुरुजनों के सम्मान और संत रविदास के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प दोहराया। कई शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर गुरु महिमा का गुणगान किया। धार्मिक स्थलों पर भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रसाद वितरण का भी आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु का सान्निध्य जीवन को सही दिशा देता है और राष्ट्र निर्माण में संस्कारवान पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति की महान गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान की महत्ता और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।



