ओमप्रकाश वर्मा
नगरा( बलिया) परमधामपीठ डूहा बिहरा (बलिया) में आयोजित पाँच दिवसीय परम्परागत गुरुपूजा यज्ञ महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को वैदिक यज्ञ मण्डप के अन्तर्गत पीठ के यज्ञाचार्य पं० रेवती रमण तिवारी के निर्देशन में पूरे दिन पूजन एवं हवनादि का सिलसिला चलता रहा।
सान्ध्य सत्र ज्ञानयज्ञ -मण्डप में अयोध्या से पधारी प्रीति पाण्डेय ने व्यासपीठ से सुधी श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया, कहा कि समय का सदुपयोग चिन्ता से नहीं, बल्कि आत्मचिन्तन, ईशाराधन और सत्संग से होना चाहिए। उन्होंने गुरुरूप शंकर, उनके विचित्र बारातियों और वैवाहिक क्रिया-कलापों का सजीव चित्रण करते हुए बताया कि दत्तात्रेय 24 गुरु बनाये किन्तु संसार के सभी गुरुओं में सद्गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरुवाणी पर विश्वास सद्यः फलदायी है। उन्होंने सारगर्भित विवाह गीतों की सुमधुर प्रस्तुति से श्रोता समाज को मुग्ध कर दिया। सम्प्रति भारतीय समाज में प्रचलित जयमाल-प्रथा को असंगत बताते हुए इस अनावश्यक खर्च वाली प्रथा का बहिष्कार किया । देव - दुर्लभ मानव तन की सार्थकता के लिए गुरु ज्ञान को आवश्यक बताया।
इसी कड़ी में चन्दौली से पधारे नन्दलाल जी उमा-शम्भु के विवाह से जोड़ते हुए कजरी की सुमधुर प्रस्तुति की —'हरी-हरी शंकर रूप भयंकर, वियाहन आयो ए हरी' भक्ति संगीत के धनी राम अशीश ने भी गुरु ज्ञान को आवश्यक बताया — " जरि जा रे ऐसो जीवन, गुरु-ज्ञान के बिना ---।" श्री शिवेन्द्र ब्रह्मचारी अध्यक्षद्वय अद्वैत शिवशक्ति संस्थान तथा श्री वनखण्डी नाथ (श्री नागेश्वर नाथ महादेव) मठ सेवा संस्थान डूहा बिहरा (बलिया) की गरिमामयी उपस्थिति में सभी आयोजित कार्यक्रम निर्विघ्न सुसम्पन्न होते जा रहे हैं क्योंकि इनमें पूज्य गुरुवर श्री मौनी बाबाजी महाराज की ऊर्जा समाहित होती परिलक्षित हो रही है।


