जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य आगमन, गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने के लिए दिलाया संकल्प

MAHARSHI TIMES
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 ओमप्रकाश वर्मा 

बिल्थरारोड(बलिया)। गोविष्टि धर्मयुद्ध की 81 दिवसीय यात्रा के तहत शुक्रवार को परमपूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य आगमन विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेमरी के प्रांगण में हुआ। 3 मई से 24 जुलाई 2026 तक चलने वाली इस धर्मयात्रा में पूज्य शंकराचार्य अपने सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं संत-महात्माओं के साथ पहुंचे, जहां क्षेत्रवासियों ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा कर जोरदार स्वागत किया।कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. टीएन मिश्रा ने अपने समर्थकों के साथ पूज्य स्वामीजी की अगवानी की। महाविद्यालय परिसर में पहुंचने पर प्रबंधक सत्यनारायण मिश्र द्वारा विधिवत पादुका पूजन किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवी-देवताओं का आह्वान, पूजा-पाठ एवं भव्य आरती संपन्न हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे परिसर में “जय श्रीराम” और “गौमाता की जय” के नारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।डॉ. टीएन मिश्रा द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसाद एवं रात्रि विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई थी। शनिवार प्रातः 7 बजे भगवान भोलेनाथ का पूजन हुआ, जिसमें मुख्य यजमान के रूप में डॉ. टीएन मिश्रा एवं महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रियंका मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।

इसके बाद सुबह 8 बजे आयोजित संवाद कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उपस्थित जनसमूह को गौमाता की रक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि “गौमाता केवल आस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की पहचान हैं। उनकी रक्षा के लिए समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।स्वामीजी ने उपस्थित लोगों से हाथ उठवाकर संकल्प दिलाया कि जो व्यक्ति गौमाता की रक्षा के लिए कार्य नहीं करेगा, उसका समर्थन नहीं किया जाएगा। उन्होंने “एक नोट और एक वोट” देकर इस धर्मयुद्ध को आगे बढ़ाने का आह्वान भी किया।संवाद कार्यक्रम में डॉ. टीएन मिश्रा ने कहा कि संत-महात्माओं का सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल परंपरा है और संस्कृति विरोधी गतिविधियां समाज के लिए घातक हैं। उन्होंने लोगों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित होने की अपील की।कार्यक्रम को सफल बनाने में संदीप श्रीवास्तव, राजू मिश्रा, धनंजय मिश्रा, शशिकांत तिवारी, रघुवीर यादव, अभयकांत यादव, हेमंत मिश्रा, सुनील सिंह, विपिन मिश्रा, आनंद यादव, प्रेमचंद मौर्य, आनंद मिश्र, मयंक पांडेय, पंकज मिश्रा, अंगद यादव, रामसेवक दास, दिनेश सिंह, दूधनाथ यादव, ओमप्रकाश पांडेय, बिट्टू मिश्रा, राहुल सिंह, दिलीप कुमार, मनोज कुमार समेत अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इसके उपरांत पूज्य शंकराचार्य अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ श्रीरामजानकी भोजबाबा मंदिर पहुंचे, जहां संत-महात्माओं एवं क्षेत्रवासियों ने श्रीरामसेवक दास और त्रिलोकी नाथ मिश्र के नेतृत्व में उनका भव्य स्वागत किया। मंदिर परिसर में स्वामीजी ने श्रीरामजानकी एवं भोजबाबा की आरती-पूजन कर जनमानस को गौसंरक्षण के लिए एकजुट होने का संदेश दिया।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह केवल आंदोलन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और गौमाता की रक्षा का धर्मयुद्ध है, जिसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर लड़ना होगा।

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