नगरा(बलिया) क्षेत्र के पिपरा पट्टी बहोरापुर गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं पंचकुंडीय रुद्र महायज्ञ का आठवां दिन शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस दौरान व्यासपीठ से रासलीला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। प्रातःकाल आचार्य विवेक शुक्ल एवं रितेश मिश्रा जी महाराज के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वेदी पूजन का अनुष्ठान विधिवत संपन्न हुआ। प्रधान वेदी लिंगोतोभद्र के साथ नवग्रह मंगल, क्षेत्रफल मंडल, योगिनी वेदी तथा वास्तुपीठ मंडल की पूजा-अर्चना की गई। वैदिक ब्राह्मणों के उच्चारण से पूरा परिसर गूंज उठा। बुढ़वा शिव मंदिर परिसर में षडांग रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों ने जल, बेलपत्र, अक्षत, पुष्प और भस्म अर्पित कर भगवान रुद्र से कल्याण की कामना कीसांध्यकाल में कथा पंडाल में व्यासपीठ पर विराजमान मानस मंदाकिनी रागिनी सरस्वती (डॉ. रागिनी मिश्रा) ने श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की कथा का रसपान कराया। उन्होंने रासलीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को वर्षा से बचाया, उसी प्रकार हमें प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
डॉ. रागिनी मिश्रा ने कृष्ण चरित्र के माध्यम से संदेश दिया कि वर्तमान समय में प्रकृति का संरक्षण ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि जब वृक्ष, नदी और भूमि सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव जीवन सुखी रहेगा। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु 'राधे-कृष्ण' और 'जय गोवर्धनधारी' के जयघोष से भक्तिमय हो उठे।
इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। आयोजन समिति के कार्यकर्ताओं ने दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए जलपान और प्रसाद की समुचित व्यवस्था की है।
