पत्रकार पर जान लेवा हमला पत्रकारों के सुरक्षा में सरकार की नाकामी ।

MAHARSHI TIMES
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केन्द्र की सरकार हो या राज्य सरकार पत्रकारों के सुरक्षा के प्रति शिथिल।  

लल्लन बागी 

रसड़ा (बलिया) वाराणसी से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता पर दो बाइक सवार आधा दर्जन से अधिक नाकाब पोस बदमाशों ने जान लेवा हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया  लोगो के आते देख हमलावर असलहा लहराते व धमकी देते आराम से निकल गये। ये योगी सरकार प्रदेश में अपराध मुक्त की बात सिर्फ खोखला साबित हो रहा है। रसड़ा न पा व कोतवाली अन्तर्गत शिवाला रोड पश्चिम मोहल्ला  शिवानन्द जायसवाल पुत्र केदार प्रसाद उर्फ शिवा नन्द वागले एक समाचार पत्र मेंं संवाद दाता के तौर पर कार्य करते है वह नित्य की भांति नगर के बाजार में ब्रह्मस्थान चाय पीने के लिए गये थे और जब वह नौ बजे घर लौट  ब्रह्मस्थान से रोशन शाह  मार्ग जा रहे  थे कि जिस तरह मुखबिर सूचना पर पुलिस कार्रवाई करती है उसी तरह मुखबिर के सूचना पर दो बाइक सवार आधा दर्जन से अधिक नाकाब पोस हमलावरों ने लाठी डंडे से जान लेवा हमला कर जान कर मारने की धमकी दे रहे थे किसी तरह चीलाते चिलाते जान बचाने के लिए वे भागे शोर व चीख सुनकर लोगो के आते देख नकाब पोस हमलावर असलहा दिखाते व जान  से मारने की धमकी देते भाग निकले । सूचना पर पुलिस पहुंची  और इलाज करा रही है।पीड़ित ने थाने मे तहरीर दिया है तहरीर में लिखा कि मै नित्य की भांति  ब्रह्मस्थान सुबह चाय पीने के लिए जाते है और नौ बजे चाय पीने के बाद अपने घर शिवाला रोड पश्चिम  मोहल्ला अपने घर चला जाता हूं। लेकिन शुक्रवार को नौ बजे जब घर जा रहा तो आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार नकाब पोस लाठी डंडे से हम पर एका एक हमला कर दिया और जान मारने की धमकी भी दे रहे थे। जब लोगो को शोर व चिल्लाने की आवाज मिला तो आते देख भागने लगे और वे सब बोल रहे थे कि कोई आया तो जान से मार देगे धमकी देते हुए आराम से भाग निकले पत्रकार पर हमला होने पर की खबर, जंगल में आग लगने की खबर तरह समूचा नगर में फैल गया   

सरकार का अपराध मुक्त बात कहां तक सही है या कारगर है यह आम सीधा साधा लोगो को लगाना एक दिवास्वप्न है जब पत्रकार सुरक्षित नही तो आम जनता कहां सुरक्षित रहेंगे।

इस मद में सुरक्षा के जिम्मेदार सुरक्षा के लिए कड़ाई से पालन करते तो अपराधी डरते अपराध करने को जब मुखबिर की सूचना देता है तो अपराधी को धड़पकड़ कर न्यायालय को सुपुर्द कर इतिश्री कर लेती है अगर पीड़ित आये और उसके बातो पर सुनवाई है ध्यान दिया जाता तो अपराध न बढता और न अपराधी बढते यह होता है उसमे सही व किसी तरह के विवाद से फंसे ज्यादा लोग व युवा होते है। इन चंगुल में  फंस जाते है सीधा साधा गरीब कमजोर लोग न्याय के लिए जाते और रूपये पैसे खर्च न करने पर उनकी नही सूने जाते है उल्टे फंसा दिये जाते इस संबंध में लल्लन बागी पत्रकार ने एक पत्रकार पर इस तरह का जान लेवा हमला चौथे स्तम्भ पर हमला है इसका घोर निन्दा करते सरकार को आगाह किया है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए  कानून नियम बना कर तत्काल लागू करे अन्यथा  पत्रकारों पर आये दिन  हो रहे हमले व जो पत्रकार सच्चाई उजागर करता है     उस पत्रकार को मौत मिलती है अगर रोक नही लगाया गया तो पत्रकार को संविधान में इतना अधिकार दिया गया है मिला है गलत करने वाले या अपराध करने वाले को स्वयं पत्रकार  हमले करने वाले या किसी के कहने पर हमला करने वालो के साथ क्या-क्या कर सकता है जिससे वह अपराध करना भूल जायेगा क्योंकि संविधान में चौथे स्तम्भ को पूर्ण अधिकार मिला है।

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