महर्षि टाइम्स
बलिया।भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में हिंदू संस्कृति का संरक्षण एवं सशक्तिकरण करने वाले संगठन विश्व हिन्दू परिषद की महिला शाखा मातृशक्ति - दुर्गावाहिनी बलिया द्वारा जिला संयोजिका बबली मिश्रा के नेतृत्व में आज के समय में युवाओं में तेजी से बढ़ रहे नशे के उन्मूलन हेतु कार्यक्रम बलिया के रामपुर के डॉ रामविचार रामरती सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में कराया गया ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बबली मिश्रा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सामने एक नयी चुनौती मुंह पसारे खड़ी है- वह यानि युवाओं में बढ़ती नशे कि लत। दारू तथा नशे के पदार्थ (ड्रग्स) इनकी लत केवल युवाओं (युवक तथा युवती) में ही नहीं अपितु स्कूली बच्चों में भी तीव्र गति से बढ़ रही है। भौगोलिक दृष्टी से भारत दो प्रमुख नशा उत्पादक क्षेत्रों के बीच में है, भारत के पश्चिम में गोल्डन क्रेसेंट (अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान) हैं तथा पूर्व दिशा में गोल्डन ट्रॅंगल (म्यांमार,थाइलैंड , लाओस) है, जहाँ से नशे के पदार्थों के तस्करी के लिए भारत प्रमुख मार्ग तथा गंतव्य है।भारत की लगभग 7.5 हज़ार किमी, समुद्री सीमा है तथा 15.1 हजार किमी से अथिक स्थलीय सीमा है, वन प्रदेश, दुर्गम पहाड़ी, रेगिस्तान ऐसी विविधता भी निगरानी रखने के लिये चुनौतिपूर्ण है। साथ ही राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर ऐसे अनेक राज्यों में प्राकृतिक नशे के पदार्थों (अफ़ीम, हेरोइन, गांजा, चरस ) की खेती भी बड़े प्रमाण में हो रही है, भारत में भी बड़ी मात्रा में फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की मौजूदगी के कारण तथा उससे ड्रग्स दुरूपयोग केलिए डायवर्जन हो रहा है। ड्रग्स की छुपी प्रयोगशालाओं के माध्यम से भी इसका फैलाव हो रहा है। आज भारत में सर्वे के अनुसार ६.५ करोड़ से ज्यादा ड्रग्स के (उपयोगकर्ता) एडिक्ट्स है, भारत के दस शहरों का जब सर्वेक्षण किया गया तो स्कूलों में 13 वर्ष कि आयु से ही ड्रग्स का उपयोग प्रारंभ हो जाता है. इसमें स्कूलों में जानेवाले (आयु १० से १५ वर्ष) बच्चों का भी प्रमाण बड़ा है, दस में से एक बच्चा उपयोग करते हुए पाया गया, बड़ी कक्षाओं में प्रमाण दुगना हो जाता है, कॉलेज में यह प्रमाण कुल विद्यार्थियों से 10% से भी ज्यादा है, हमारी युवा पीढ़ी इस संकट से बर्बाद हो रही है। सरकारी प्रयासों से 2019 से लेकर 2024 के बीच 1,30,634 एकड़ में अवैध अफीम की खेती नष्ट की गई है. प्रतिवर्ष लगभग 1लाख से अधिक लोगों की गिरफ़्तारी नशे के व्यापार या तस्करी के लिए हो रही है,
सन् 2024 में मध्यप्रदेश में 1,300 किग्रा गांजा, कर्नाटक में 1,591 किग्रा गांजा, दिल्ली में 81.5 किग्रा कोकेन, तामिलनाडू में 7,334 किग्रा की ज़ब्ती हुई है, पिछले वर्ष ₹.40,000 करोड़ के नशे के पदार्थ पकड़े गए हैं, यह कुल नशे के पदार्थों के व्यापार की अनुमानित १०% से भी कम है, इससे हम इस संकट कि व्यापकता समझ सकते है।कार्यक्रम के उद्देश्य को विस्तृत करते हुए भारती सिंह जी ने बताया कि नशे के कारण व्यक्ति के रिश्ते, आर्थिक स्थिती, पारिवारिक स्थिती, पढ़ाई, स्वास्थ्य, भविष्य सभी का नुक़सान हो रहा है, इसलिए जागरण कर हमारे युवाओं को व्यायाम, योग, अध्यात्म, संपर्क, प्रबोधन के माध्यम से इस खतरे से बचाना होगा। विद्यालय, महाविद्यालय, कोचिंग क्लासेस आदि शिक्षण संस्थानों में संपर्क कर जागरण करना होगा, परिवारों में सभी से संवाद करना तथा जागरूकता से निगरानी भी रखना, अपने परिवार- कुटुंब के अंदर भी इन बातों की तथा खतरों की खुलकर चर्चा होनी चाहिए। बच्चों के व्यवहार में नशे के कारण से परिवर्तन आता है, जो इस ख़तरे के बारे संकेत देते है। आज स्वास्थ्य क्षेत्र में पुनर्वास सहायता की सुविधाएं खड़ी हुई है, जिसका लाभ हमें नशे की लत लगे हुए युवाओं को दे सकते हैं, काउन्सलिंग तथा वैद्यकीय चिकित्सा भी करनी होगी। समाज में भी अत्यंत सतर्कता की आवश्यकता है। अपने माध्यम से हज़ारों प्रखंडों में ऐसे अनेक कार्यक्रमों का आयोजन वर्षभर में होनेवाला है। भारत के सीमावर्ती राज्य, बड़े शहरों में यह खतरा अधिक है, जो युवा इस नशे के चक्रव्यूह में अटक गए हैं उन्हें बाहर निकालने के लिए भी प्रयास करना होगा। सामाजिक-अध्यात्मिक संगठनों तथा समाज की बृहद सहभागिता से इस चुनौती का सामना हम कर सकते है। विद्यालय की प्रधानाचार्या ममता दीदी ने भी बहनो को संबोधित किया तथा दुर्गा वाहिनी द्वारा चलने वाले अभियान में सहयोग करने की बात कही। इस कार्यक्रम में प्रभावती दीदी की उपस्थिति रही। उक्त कार्यक्रम में दुर्गावाहिनी की माननीय जिला संयोजिका बबली मिश्र ने सभी बालिकाओं को नशे से दूर रहने हेतु शपथ दिलाया।

