शैलेश सिंह
बैरिया, बलिया । कीर्तन-भजन और सत्कर्म ही व्यक्ति के साथ ऊपर जायेगा बाकी सब भौतिक संसाधन और धन-संपदा यही के यही रह जायेगा । भगवान का भजन और कीर्तन एक ऐसी दवा है जो सिर्फ और सिर्फ लाभ ही देगा , नुकसान की कही कोई गुंजाइश नही ।
उक्त आध्यात्मिक प्रवचन क्षेत्र के सुविख्यात सन्त स्वामी श्री हरिहरानन्द जी के है जो शुक्रवार की शाम ग्राम कर्णछपरा में श्री ठकुरी बाबा मठ पर श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को चाहिये कि वह प्रतिदिन कम से कम ढाई घंटे ईश्वर का भजन करें । स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक परिवार में अपने बच्चों को बचपन से ही अच्छा संस्कार और भजन की आदत डालनी चाहिये । उन्होंने कहा कि जहाँ भगवान का नियमित भजन होता है ,वहाँ कभी भी दैहिक, दैविक और भैतिक सन्ताप नही होता , वहा अमृत की वर्षा होती है । उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति को अपने बढ़ते उम्र के साथ भजन-कीर्तन का समय भी बढ़ाना चाहिये ।
उल्लेखनीय है कि ग्राम कर्णछपरा में 11 फरवरी 2012 से शास्वतखण्ड संकीर्तन चल रहा था जो विगत दो-ढाई वर्षो से बन्द जैसा हो गया था । स्वामी श्री हरिहरानन्द जी ने ग्रामवासियों को संकीर्तन पर व्यापक प्रकाश डालते हुये इसे पुनः चालू कराया और संकीर्तन संचालन व्यवस्था की जिम्मेदारी अमर सिंह को सौंपी । इस अवसर सैकड़ों महिला-पुरूष श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के जयकारे के साथ शास्वतखण्ड संकीर्तन को पुनः चालू किया और अपनी-अपनी समयानुसार भागीदारी सुनिश्चित किया ।

