रजनीश श्रीवास्तव
सिकंदरपुर (बलिया) - क्षेत्र की नहरों में पानी न आने से इस बार किसान धान की खेती को लेकर बेहद परेशान हैं। धान की नर्सरी डालने का समय बीतता जा रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे सैकड़ों किसान खेत सूखे रहने के कारण बेबस हो गए हैं। गौरतलब है कि सिकंदरपुर इलाके की सिंचाई व्यवस्था मुख्य रूप से तुर्तीपार कैनाल पर आधारित है। परंतु इस वर्ष सिकंदरपुर रजवाहा, रुद्रवार माइनर, हुसैनपुर माइनर और बघुरी माइनर की नहरों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है। इससे उन किसानों की उम्मीदें टूट रही हैं, जो हर साल इन्हीं नहरों से सिंचाई कर अपनी खेती करते हैं। ग्रामीण किसान दयाशंकर प्रजापति ने कहा कि, "नहरों में पानी न आने से हम समय से धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। जो किसान किसी तरह से नर्सरी डाल भी दिए हैं, उनकी फसल पानी के अभाव में सूखने लगी है। यह हम किसानों पर सीधा आर्थिक हमला है। अगर जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो हमें मजबूर होकर अधिकारियों से शिकायत करनी पड़ेगी।" किसानों का कहना है कि सरकार और विभाग बड़ी-बड़ी योजनाओं की बात तो करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। भीषण गर्मी और समय की कमी के बीच अब नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग तेज हो गई है। किसान प्रतिदिन नहरों की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। क्षेत्रीय किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

