हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्ष : लक्ष्य निर्धारित कर हिंदी पहुंची पूरे विश्व के मानचित्र पर

MAHARSHI TIMES
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हिंदी पत्रकारिता न कभी झुकी थी, न कभी झुकेगी : प्रो ओमप्रकाश सिंह


 





महर्षि टाइम्स 

बलिया।।जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय,बलिया में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर "हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष " विषयक संगोष्ठी / शपथ ग्रहण / सम्मान समारोह का आयोजन जेएनसीयू और भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ किया गया।यह संगोष्ठी हिंदी विभाग,पत्रकारिता विभाग एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. ओमप्रकाश सिंह पूर्व निदेशक,मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी रहे। प्रो सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता राष्ट्रीय आंदोलन एवं उसके बाद भी राष्ट्रीयता के लिए सदैव समर्पित रही है।हिंदी पत्रकारिता संघर्ष और विकास के लिए सदैव आगे बढ़ी है। प्रो सिंह ने कहा कि 30 मई 1826 को जिस उदंड मार्तण्ड का पंडित युगल किशोर शुक्ल ने राष्ट्रीयता की भावना के साथ शुरू किया था, वह हिंदी पत्रकारिता आज ऐसी कोई जगह नहीं जहां न पहुंची हो। अंग्रेजों का शासन हो या 1975 का आपात काल हो, हिंदी पत्रकारिता ने कभी घुटने नहीं टेके। स्वाधीनता की लड़ाई मे पूरे देश मे आजादी की अलख जगाने मे हिंदी के अखबारों की अहम भूमिका थी। हिंदी के अखबारों न केवल आजादी की ज्वाला को लोगों के दिलो मे धधकाया, बल्कि सामाजिक कुरीतियों पर भी जमकर हमला बोला।

आजादी की लड़ाई के समय जो सेनानी थे, वो अखबारों के संपादक भी थे, जेल जाते थे, यातनायें सहते थे और बाहर निकलने के बाद फिर से अख़बार निकालने लगते थे। पराधीनता के दौर मे साहित्यकार भी पत्रकार की भूमिका मे खडे रहे। पराधीनता के दौर मे हिंदी पत्रकारिता का लक्ष्य जहां देश की आजादी को हासिल करने के लिये लोगों को जागृत करना था, तो वही आजादी के बाद देश के विकास के लक्ष्य को सब के सामने लाना रहा है। आपातकाल के दौर मे भी हिंदी पत्रकारिता ने घुटने नहीं टेके और सरकार की तानाशाही का तब तक विरोध जारी रखा जब तक देश से आपातकाल खत्म नहीं हुआ।

आज हिंदी पत्रकारिता विश्व के हर कोने मे पहुंच गयी है। हिंदी का सबसे ज्यादे विरोध करने वाले दक्षिण भारत के चेन्नई से राजस्थान पत्रिका का प्रकाशन यह बताने के लिये काफ़ी है कि इन 200 वर्षो मे हिंदी ने कितनी तरक्की की है। आज जनजन की भाषा के रूप मे हिंदी जानी जा रही है। आज हिंदी पत्रकारिता के सामने लक्ष्य 2047 का विकसित भारत है। आज पूरी दुनिया मे सबसे ज्यादे हिंदी अख़बार निकलते है, सबसे ज्यादे न्यूज चैनल है और सब से ज्यादे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सोशल एक्टविस्ट है। प्रो ओपी सिंह ने संगोष्ठी के आयोजन करने के लिये जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय और भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ को साधुवाद दिया।

श्री धर्मेंद्र सिंह  प्रधान संपादक लोक सम्मान पत्रिका ने ,कहा कि हिंदी पत्रकारिता  राष्ट्र को हमेशा साथ लेकर चली है।हिंदी पत्रकारिता का विकास राष्ट्रीयता का विकास है। श्री सिंह ने कहा कि आज हमको अपनी पत्रकारिता के माध्यम से देश की प्रगति को रेखांकित करने, आगामी 2047 तक भारत कैसे विकसित भारत बने, इसको लक्ष्य रखना है। आजादी की लड़ाई के दौरान जिस तरह से तत्कालीन अखबारों ने अपनी पत्रकारिता का लक्ष्य आजादी हासिल करना रखा था, आज हमें उसी तरह से विकसित भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित करना है। श्री सिंह ने कहा कि पीत पत्रकारिता से और नकारात्मक पत्रकारिता से कभी भी कुछ हासिल नहीं हुआ है। चुंकि हिंदी जन जन की भाषा बन गयी है, इस लिये हमें बहुत ही सतर्कता और संयम के साथ अपनी खबरों को पाठकों तक पहुँचाना है। 200 सालों मे हिंदी पत्रकारिता ने इतनी तरक्की कर ली है कि आज जहां अंग्रेजी के अखबारों की संख्या घटती जा रही है, वही हिंदी के अखबारों की संख्या के बढ़ने के साथ  ही इनके पाठकों की संख्या पूरे विश्व मे फ़ैल चुकी है।

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए कुलपति प्रो.संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।हमें अपने सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से भारत को विकसित भारत का निर्माण करना है। प्रो गुप्ता ने कहा कि पंडित युगल किशोर ने अपने पत्र की शुरुआत नारद जयंती से कर के यह संदेश देने का काम किया कि नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने के लिये सकारात्मक शक्तियों मे प्रेरणा का संचार जिस तरह से महर्षि नारद करते थे, उदन्त मार्तण्ड भी वही काम करेगा। देश की आजादी मे हिंदी पत्रकारिता की पहली शुरुआत पूरे देश मे स्वाधीनता की ज्वाला को धधकाने मे नीव की पत्थर बनी। हिंदी के अखबारों ने वह अलख जगायी कि अंग्रेजी साम्राज्य हिल गया। सबसे ज्यादे हिंदी के अखबारों, इसके संपादको और पत्रकारों को अंग्रेजों ने प्रताड़ित किया।

प्रो गुप्ता ने आज की नकारात्मक पत्रकारिता पर भी जमकर हमला बोला। कहा कि किसी भी समस्या पर तार्किक विमर्श तो करना अच्छी बात है लेकिन बिना समस्या के विमर्श के माध्यम से समस्या पैदा करना यह ठीक पत्रकारिता नहीं है। कहा कि समाज मे पत्रकारिता का लोकतंत्र के चौथे पायदान के रूप मे मान्यता मिली हुई है। यह इस लिये मिली हुई है कि पत्रकारिता के माध्यम से संविधान के तीनो स्तम्भ पर नजर ही न रखी जाय बल्कि अगर इनके द्वारा किये जा रहे कार्यों से जनहित उपेक्षित हो रहा है, तो उसको उजागर कर कमियों को दूर करने के लिये बाध्य किया जाय। प्रो गुप्ता ने भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रांतीय मुख्य महासचिव मधुसूदन सिंह के साथ हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जिलाध्यक्ष के रूप मे शपथ लेने वाले राणा प्रताप सिंह, सिकंदरपुर के अध्यक्ष नूर आलम व बेल्थरा रोड तहसील के अध्यक्ष शब्बीर अहमद को इस आयोजन को विश्वविद्यालय परिसर मे आयोजित करने के लिये धन्यवाद प्रेषित किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप मे मंच पर विराजमान भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के प्रांतीय मुख्य महासचिव ने अपने सम्बोधन के अधिकांश समय को मुख्य अतिथि को देते हुए महासंघ के कार्यों को संक्षिप्त मे बतालाते हुए कहा कि महासंघ देश के 14 राज्यों मे पत्रकारों के मान सम्मान के रक्षक के रूप मे पहचाना जा रहा है। साथ ही महासंघ साहित्यकरों को भी समय समय पर सम्मानित करता रहता है जिससे साहित्यकार भी अपनी लेखनी के माध्यम से समाज मे सकारात्मकता का संचार कर सके। श्री सिंह ने नव निर्वाचित जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, बेल्थरा रोड के तहसील अध्यक्ष शब्बीर अहमद और सिकंदर पुर के तहसील अध्यक्ष नूर आलम को शपथ ग्रहण कराया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रो ओमप्रकाश सिंह, कुलपति प्रो संजीत कुमार गुप्ता, प्रो पुष्पा मिश्रा, मधुसूदन सिंह, अरुण सिंह गामा आदि ने मां सरस्वती व चंद्रशेखर जी के चित्रों पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित करके किया। मंचासीन सभी अतिथियों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों द्वारा बलिया के तीन साहित्यकारों / कवियों  डॉ आर एन उपाध्याय, श्री शशिप्रेम देव सिंह और बृजमोहन प्रसाद अनारी को स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्रम से सम्मानित किया गया। अपने अपने क्षेत्रों मे अद्वितीय प्रदर्शन करने वाले डॉ अरुण सिंह गामा, श्री अशोक कुमार सिंह, डॉ सुनिल कुमार ओझा, श्री संतोष कुमार शर्मा, श्री रवि सिन्हा, श्री राणा प्रताप सिंह, नजरुलबारी, श्री शब्बीर अहमद, डॉ पुष्पा मिश्रा, डॉ विनय जी, डॉ संदीप यादव, डॉ अनुराधा राय आदि विशिष्ट व विश्व विद्यालय और भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के सदस्यों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर श्री शशि प्रेम देव सिंह,श्री बृजमोहन प्रसाद अनाड़ी एवं डॉ.आर.एन.उपाध्याय ने अपनी स्वरचित कविता पाठ किया।कार्यक्रम में पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ठ योगदान के लिए पत्रकारों को सम्मानित किया गया।विषय प्रवर्तन डॉ.संदीप यादव ने किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.अनुराधा राय,स्वागत वक्तव्य डॉ विनय कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.अजय चौबे ने दिया।इस अवसर पर कुलसचिव एस .एल.पाल,श्री मधुसूदन सिंह,डॉ.पुष्पा मिश्रा,डॉ संजीव कुमार,डॉ.रूबी, डॉ शैलेन्द्र सिंह एवं संतोष शर्मा, नरेंद्र मिश्रा, जितेन्द्र कुमार सिंह, (बिकास) असगर अली, जमाल, ओमप्रकाश पांडेय, रोहित सिंह,पत्रकार विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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