महर्षि टाइम्स
रसड़ा (बलिया) नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रो में गोवर्धन गोधन पुजा बड़े धूमधाम से की गयी इस पुजा में सुहागिन महिलाए व लड़किया अपने भाई के सुरक्षा के लिए पुजा करती है इसमें गाय को लक्ष्मी शुभ माना गया है जिसे गोबर से चारोतरफ चौकोर एक घेरा बनाकर उसमे गोधन का चित्र व उसमें सांप बिच्छू के चित्र बनाती है घरो में काटो व धतूरा अन्य बनकेपतेकाटे से सुहागिन महिलाए लड़कियां श्रापकर गोधन कुटने वाले जगह पर अपने घरो से लेजाकर रखती है गोबर से बने गोवर्धन पर्वत व गोधन के स्थान पर काटो के एकठा होजाने सेवक ऊंचा पर्वत पहाड़ जैसा बन जाता है। वही गोधन को महिलाए मंगल गीत गाते हुए। अगरबत्ती धुप, घी आदि से पूजने के बाद उसे मूसल से कूटती है इस पुजा में तरह तरह के मिठाई चिउरा आदि चढ़ाकर घर ले जाती है और दूसरे दिन अपने घर परिवार के लोगो बच्चो को खाने को देती है गोवर्धन पुजा को अन्नकूट पुजा भी कहते है यह भी मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण नें अपने गांव वासियो को इन्द्र के प्रकोप से अपने तरजनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बचाये थे जिसे हम गोबर्धन,पुजा की जाती है व महिलाए व लडकियां भाई के सुरक्षा के लिए गोधन पुजा अन्नकूट पुजा करती है।
