पूर्वांचल के मालवीय’ के शिक्षा, सहकारिता और समाजसेवा के योगदान को किया गया याद
महर्षि टाइम्स
बलिया। कुँवर सिंह पीजी कॉलेज में महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक, लोक-जन चेतना के संवाहक, सहकारिता आंदोलन के प्रणेता एवं शिक्षा के माध्यम से समाज में विकास की नई धारा प्रवाहित करने वाले बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ की 47वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संगोष्ठी एवं व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्रबंधक इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता तथा प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रबंधक नन्दलाल सिंह तथा विशिष्ट अतिथियों के रूप में दिनेश बहादुर सिंह, डॉ. गजेंद्र पाल सिंह (पूर्व प्राचार्य), प्रो. बैकुंठ नाथ पाण्डेय (प्राचार्य, सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया), प्रो. निर्मला सिंह (प्राचार्या, मर्यादा पुरुषोत्तम कॉलेज, रतनपुरा) एवं प्रो. दयालानन्द राय (प्राचार्य, टी.डी. कॉलेज) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुँवर सिंह एवं बाबू शिवशंकर सिंह ‘वकील साहब’ की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई। इसके बाद शिवशंकर सिंह सभागार में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महाविद्यालय की छात्राओं निक्की एवं नेहा ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि बाबू शिवशंकर सिंह के विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे। उन्होंने लोक को केंद्र में रखकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका व्यक्तित्व इतना विशिष्ट था कि उन्होंने पूरे समाज को अपना परिवार मानकर सेवा की। इस अवसर पर अश्वनी सिंह, जीपी सिंह सहित अन्य विद्वानों ने बाबू शिवशंकर सिंह के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि वकील साहब सहृदय, परोपकारी एवं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए समर्पित महापुरुष थे। वे महात्मा गांधी एवं मालवीय जी के विचारों से प्रभावित होकर शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते रहे। मुख्य अतिथि नन्दलाल सिंह ने कहा कि बाबू शिवशंकर सिंह कहा करते थे कि “सच्ची क्रांति सौंदर्य और सम्पूर्णता की सीमा है।” उन्होंने कहा कि वकील साहब गरीबों के मसीहा और परोपकार एवं दया की प्रतिमूर्ति थे। वे कर्म को ही धर्म मानते थे और पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले अग्रणी व्यक्तित्वों में शामिल थे। उनके प्रयासों से तैयार हुई शैक्षिक विरासत से आज भी भावी पीढ़ियां लाभान्वित हो रही हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामावतार उपाध्याय ने तथा आभार ज्ञापन डॉ. मनजीत सिंह ने किया।
इस अवसर पर अवनीश सिंह, राजेश कुमार यादव, प्रो. अखिलेश राय, डॉ. संदीप पाण्डेय, प्रो. फूलबदन सिंह, प्रो. सत्य प्रकाश सिंह, प्रो. सच्चिदानंद राम, प्रो. अजय बिहारी पाठक, प्रो. संजय, प्रो. दिव्या मिश्रा, डॉ. हरिशंकर सिंह, डॉ. शैलेश पाण्डेय, आनंद सिंह, डॉ. आशीष कठेरिया, डॉ. मदन राम, डॉ. योगेंद्र, अनिल गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. राजेन्द्र पटेल, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. योगेंद्र यादव, डॉ. धीरेन्द्र सिंह, लाल वीरेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. सुनील चतुर्वेदी, रत्नसेन सिंह, डॉ. प्रशांत, डॉ. शशिप्रकाश, डॉ. विपुल सिंह, सुजीत कुमार, पुनिल कुमार, डॉ. अवनीश जगन्नाथ, मनोज सिंह, डॉ. प्रमोद सिंह, डॉ. अंकिता सिंह, डॉ. विजया वर्मा, शबाना खातून, रामकुमार सिंह, राजकुमार, शाश्वत सिंह, दीपक सिंह सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



