ओमप्रकाश वर्मा
नगरा (बलिया)।सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के, सरयू नदी के तटवर्ती ग्राम डूहा बिहरा स्थित अद्वैत शिवशक्ति परमधाम पीठ में आयोजित अद्वैत शिवशक्ति यज्ञ सहित परम्परागत गुरुपूजा महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को उक्त पीठ के यज्ञाचार्य पं रेवती रमण तिवारी के आचार्यत्व में आवाहित देवों और देवशक्तियों का पूजनार्चन किया गया।
सान्ध्य सत्र ज्ञानयज्ञ-मण्डप के अन्तर्गत वैराग्य भूमि अयोध्या से चलकर यहाँ पधारीं प्रीति पाण्डेय और उनकी टीम ने भागवती-कथा के अनन्य प्रेमीरुद्रावतार श्री हनुमान जी की भावभीनी वन्दना की, तत्पश्चात् सुधी श्रोताओं को सम्बोधित करती हुई विदुषी पाण्डेय जी ने रामकथा पर आधारित अपने वैदुष्यपूर्ण वक्तव्य में भगवान शंकर द्वारा सती का त्याग एवं शम्भु की दीर्घ समाधि इत्यादि प्रसंगों गुरुतत्त्व से जोड़ते हुए मार्मिक एवं रोचक ढंग से प्रस्तुति की। वस्तुतः भगवान शंकर जी सती/पार्वती के न केवल पति थे बल्कि सद्गुरु भी थे, तत्त्वज्ञ महापुरुष भी उनको गुरुवत् मानते हैं- "वन्देबोधमयं नित्यं गुरुंशंकर रुपिणम्।"...
कहा कि पिता पूजनीय अवश्य होते हैं किन्तु जब कन्या विवाहिता हो जाय तो उसे स्वपति की आज्ञा के विपरीत मायके या अन्यत्र कहीं नहीं जाना चाहिए क्योंकि पतिव्रता के लिए उसके पति से महान कोई नहीं। वैसे भी कन्या पराया धन हुआ करती है — "अर्थो हि कन्या परकीय एव" श्री शिवेन्द्र ब्रह्मचारी अध्यक्ष द्वय अद्वैत शिवशक्ति संस्थान तथा श्री वनखण्डी नाथ (श्री नागेश्वर नाथ महादेव) मठ सेवा संस्थान डूहा बिहरा, बलिया एवं भगवद् भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति में. सञ्चालन सत्यनारायण यादव ने किया।

