महर्षि टाइम्स
बलिया। जनपद में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर करीब 21 वर्षों तक नौकरी कर रहे एक सहायक अध्यापक को आखिरकार सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मनीष कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी कराने के निर्देश भी जारी किए हैं।
बर्खास्त किए गए शिक्षक की पहचान सुनील कुमार के रूप में हुई है, जो शिक्षा क्षेत्र नगरा के कंपोजिट विद्यालय बाराडीह लवाईपट्टी में तैनात थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सुनील कुमार ने वर्ष 2004 में बीटीसी चयन प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर शिक्षक पद हासिल किया था, जबकि वह वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंधित हैं।
यह मामला सबसे पहले वर्ष 2015 में प्रकाश में आया था, जब सीयर ब्लॉक के निवासी हरींद्र प्रसाद ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और बीएसए को लिखित शिकायत भेजकर इस फर्जीवाड़े की जांच की मांग की थी। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि सुनील कुमार ने धोखाधड़ी कर न केवल सरकारी नौकरी प्राप्त की, बल्कि दो दशकों से अधिक समय तक वेतन भी उठाते रहे।
गंभीर अनियमितता को देखते हुए बीएसए मनीष कुमार सिंह ने तत्काल प्रभाव से सुनील कुमार की सेवा समाप्त कर दी है। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि संबंधित शिक्षक के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाए और अब तक प्राप्त समस्त वेतन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे और फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वालों के खिलाफ जांच अभियान भी तेज किया जाएगा। यह मामला न केवल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अब किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
