रजनीश श्रीवास्तव
सिकन्दर पुर (बलिया) - उत्तर प्रदेशीय बरनवाल वैश्य सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश बरनवाल ने कहा कि बुलन्दशहर हमारे समाज के आदि पुरुष महाराजा अहिवरन जी की जन्मभूमि है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी उनकी जयंती 26 दिसम्बर को बुलन्दशहर में एक दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रम के रूप में मनाई जाएगी, जिसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है। उन्होंने बताया कि बुलन्दशहर जिले का प्राचीन नाम बरन नगर था, जिसका प्रमाण आज भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। विदेशी आक्रमणकारियों ने न केवल इसका नाम बदलकर बुलन्दशहर कर दिया, बल्कि समाज के लोगों पर उत्पीड़न कर उन्हें पलायन करने को भी विवश किया। संगठन आज उस गौरवशाली स्मृति को पुनः स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। इसी क्रम में बुलन्दशहर में महाराजा अहिवरन जी की भव्य प्रतिमा स्थापित कराने की प्रक्रिया चल रही है। यह बातें उन्होंने शुक्रवार की शाम स्थानीय बरनवाल सेवा समिति द्वारा समिति के कोषाध्यक्ष पारसनाथ बरनवाल के प्रतिष्ठान पर आयोजित बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में कहीं। उन्होंने कहा कि समाज आर्थिक रूप से मजबूत होते हुए भी शिक्षा, राजनीति और सामाजिक पहचान में पीछे है। इसलिए समाज को चाहिए कि बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर करें। उन्होंने संगठन की शिथिलता पर चिंता व्यक्त करते हुए हर माह नियमित बैठक करने और रतसड़, कोथ, करमौता तथा माल्दह के स्वजातीय बंधुओं को जोड़ने का सुझाव दिया। बैठक की अध्यक्षता अजय बरनवाल बब्लू ने की। उपाध्यक्ष ओमजी बरनवाल व महामंत्री अरविन्द बरनवाल झब्बू ने भरोसा दिया कि अब प्रत्येक माह बैठक आयोजित होगी। बैठक का शुभारम्भ महाराजा अहिवरन जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ और समापन पर सभी ने स्वादिष्ट बाटी-चोखा का आनंद लिया।
इस अवसर पर पारसनाथ बरनवाल, राजेश बरनवाल, लल्लन बरनवाल, अरविन्द बरनवाल, संजय बरनवाल, अशोक बरनवाल, रूपेश बरनवाल, विपिन बरनवाल, जीउत लाल सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। संचालन राकेश बरनवाल ने किया।

