आजादी के जंग के रणबांकुरे बलिराम के पौत्र पौत्रियो का एडीएम ने नही जारी किया सेनानी पौत्र आश्रित प्रमाण पत्र।
महर्षि टाइम्स\रिपोर्टर \शिवसागर पाण्डेय
रेवती(बलिया)। बीते 29 जुलाई के दिन सहतवार के स्वतंत्रता सेनानी के बेटे के साथ एडीएम जैसे जिले के बड़े अधिकारी द्वारा किए गए कथित दुर्यव्यहार सोचने पर विवश कर रहा है कि जिसने जंग - ए - आजादी में अंग्रेजो की पीड़ा सही ताकि देश के लोग आजादी में सास ले।आज उन्हीं के परिवार को सेनानी परिवार होने पर प्रश्न खड़ा किया जा रहा है।
सहतवार निवासी स्वतंत्रता सेनानी बलिराम वर्मा सन 1944 में 6 माह जेल में बंद रहे।भारत सरकार व प्रदेश सरकार वर्मा तथा उनके निधन के बाद पत्नी को सेनानी सम्मान पेंशन दिया।बलिराम वर्मा के बेटे हरेंद्र ने सन् 2024 में अपने बेटा और बेटी को सेनानी पौत्र आश्रित प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था।जिले से लेकर तहसील तक जांच करने में प्रशासन को एक वर्ष का समय लगा।यही नही डेढ़ माह से एडीएम आफिस में उक्त पत्रावली धूल फाक रही थी।जब एडीएम के सामने हरेंद्र वर्मा पेश हुए तो साहेब ने मातहदो से जांच में इतना समय क्यो लगा पूछने की जगह सेनानी और आवेदक पर ही फर्जी होने की जुबानी मुहर लगा दी।इसका हश्र यह हुआ कि वर्मा सन्न होकर अन जल ही छोड़ दिया।इसकी भनक लगने पर वार्ड 12 के सभासद आनंद सिंह पिंटु ने जूस पिलाकर आघोषित अनशन तोड़वाया।वर्मा के घर पर जुटे सेनानी आश्रित संगठन के शिवशंकर श्रीमाली,शिवसागर पाण्डेय,जीतेंद्र गुप्ता,सोनू पाण्डेय के अलावे पिंटु कुंवर,जमशेद अहमद,दीपक कुमार,सोनू पाण्डेय ने घटना क्रम की तिखी निंदा करते हुए कहा सेनानी परिवार की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।समय से प्रमाण पत्र न मिलने से सेनानी पौत्री सलोनी आईईआरटी में दाखिले में छुट का लाभ नही मिलेगा।क्यूकि 2 अगस्त को ही उसका काउंसलिंग होना है।
