जनपद की बेटी NEET 2025 परचम लहराया, गांव में हुआ भव्य स्वागत

MAHARSHI TIMES
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"कोटा से उठी उड़ान, बलिया में रचा इतिहास: NEET 2025 में संस्कृति सिंह की बाजीगरी, गांव इनामी पुर में हुआ भव्य स्वागत"

महर्षि टाइम्स 

नगरा(बलिया)।बेटियां अब केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं रहीं—बल्कि वो आज पूरे देश में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से परचम लहरा रही हैं। इसी की जीती-जागती मिसाल बनी हैं नगरा क्षेत्र की संस्कृति सिंह, जिन्होंने NEET 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 720 में से 616 अंक प्राप्त किए और ऑल इंडिया में 1200वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।

बलिया जिले के इनामीपुर गांव निवासी संस्कृति ने यह सफलता कोटा, राजस्थान में रहकर कठिन परिश्रम और अनुशासन के बल पर हासिल की है। उनके पिता अजीत सिंह व माता किरण सिंह की आँखों में बेटी की सफलता से गर्व और आंसू दोनों थे। संस्कृति की इस कामयाबी पर गांव, समाज और पूरे जिले में जश्न का माहौल है।

संस्कृति के बलिया आगमन पर जैसे ही वह नरहीं चहटी (नगरा) पहुंचीं, वहां क्षेत्रवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़े, फूल-मालाएं और मिठाइयों के साथ संस्कृति का अभिनंदन किया गया। चारों तरफ सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा था—"संस्कृति सिंह ज़िंदाबाद!"

इस अवसर पर उनकी बड़ी बहन रजनी सिंह ने उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया। ग्रामीणों ने गर्व से कहा कि आज इनामीपुर की बेटी नहीं, बल्कि पूरे बलिया की बेटी बन गई है संस्कृति।

वर्तमान ग्राम प्रधान राजू सिंह, जो खुद शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय माने जाते हैं, ने भी इस सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि "संस्कृति जैसे बच्चों से ही गांव की तक़दीर बदलेगी।"

संस्कृति, पूर्व प्रधान राजन सिंह की भतीजी हैं, जिन्होंने शुरू से ही उनकी पढ़ाई को लेकर विशेष रुचि ली।

इस मौके पर सतीश सिंह, उमेश पांडे, राजीव सिंह, विजय प्रकाश प्रजापति, राजन सिंह सहित अनेक क्षेत्रीय गणमान्य लोगों ने उनकी इस कामयाबी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

वर्तमान समय में जब गांवों की बेटियों को आगे बढ़ने के मौके कम मिलते हैं, ऐसे में संस्कृति की ये उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।

गांव के छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बधाइयाँ दीं। खास बात यह रही कि संस्कृति की सफलता को सिर्फ शैक्षणिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

संस्कृति सिंह का सपना है कि वह डॉक्टर बनकर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा में योगदान दें। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया।

बलिया के शिक्षा जगत में संस्कृति की यह कामयाबी एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। निस्संदेह, इनामीपुर गांव की बेटी ने इस बार NEET की बाजी मार ली है—और पूरे जनपद को गर्व से भर दिया है।

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