रजनीश श्रीवास्तव
सिकंदरपुर (बलिया) - तहसील क्षेत्र के एक छोटा सा गांव सिवानकला आज भक्ति की लहर से सराबोर हो गया, जब सैकड़ों कांवरियों का एक विशाल जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुआ। सावन का पावन महीना हो और उसमें बाबा भोलेनाथ की यात्रा — यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का संगम है। सिर पर गंगाजल की कांवड़, बदन पर केसरिया वस्त्र, और होठों पर 'बोल बम' का जयकारा लिए श्रद्धालु जब गांव की गलियों से निकले, तो मानो हर रास्ता शिवमय हो गया। गांववासियों ने जगह-जगह फूलों से स्वागत किया, ढोल-नगाड़ों की थाप पर भावभिन नृत्य करते कांवरिये कुछ ही समय में एक भक्ति-कारवां बन गए। कांवरियों के सहयोगी गोविंद गुप्ता ने बताया कि जत्था सबसे पहले सुल्तानगंज पहुंचेगा, जहां पवित्र गंगा जल से कांवड़ भरी जाएगी। इसके बाद कांवरिये लगभग 105 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) और फिर बाबा बासुकीनाथ में जलाभिषेक करेंगे। लेकिन इस बार की यात्रा यहीं नहीं रुकेगी — कांवरियों का संकल्प है कि बाबा के दर्शन के बाद वे राजगीर, गया, कोलकाता और रजरप्पा जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा भी पूरी करेंगे। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक बन चुकी है। इस यात्रा में सुमेर राजभर, प्रभुनाथ गुप्ता, सुनील कनौजिया, संतोष शर्मा, अंजली शर्मा, बृजमोहन गुप्ता, कृष्णा राजभर, योगेश राजभर, शेषनाथ, अजीत, चंदन समेत सैकड़ों माता-बहनों और युवा श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। सबका एक ही स्वर— "बोल बम! बोल बम! बाबा धाम चलें हम!" सड़क पर जब यह जत्था गुज़रा, तो राहगीर रुककर नमन करने लगे — क्योंकि यह यात्रा केवल कांवड़ नहीं, विश्वास की वह डोरी है, जो गांव को भगवान से जोड़ देती है।
