प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रहा रसड़ा का महत्वपूर्ण प्यारेलाल चौराहा

MAHARSHI TIMES
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नगर के यह प्रमुख चौराहा  यातायात, पेयजल, सामुदायिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां पर नही।

नगर बाजार में क्षेत्र व दूर दराज से आने वाले को परेशानी झेलना पड़ता है सबसे अधिक महिलाओ को होती है

महर्षि टाइम्स 

रसड़ा (बलिया) छोटी काशी के नाम से सुविख्यात रसड़ा नगर का अति प्राचीन व व्यस्तम प्यारेलाल चौराहा जनपद का ऐतिहासिक पौराणिक औद्योगिक नगर का जन    प्रतिनिधियों के निष्क्रियता अपना स्वार्थ के चलते यह नगर लोगो को झेलना पड़ रहा है। अस्तित्व को बचाने के लिए लंबे समय से प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है किंतु नहीं तो प्रशासन ही यहां की मूलभूत जरूरतों को समझ पा रहा है और नहीं राजनीति से जुड़े राजनेता ही इस चौराहा का कायाकल्प करने की जहमत उठा पा रहे हैं। जिसके चलते यह चौराहा जहां पेयजल, सामुदायिक शौचालय जैसी मूलभूत जरूरतों से जूझ रहा है वहीं लगभग दो किमी की दूरी तय कर ठेला वाले, ई-रिक्शा वाले, बाइक सवार इस पार से उस पार जाने को विवश दिखाई पड़ रहे हैं जो उनके काफी कष्टदायक साबित हो रहा है। लगभग सात वर्ष पूर्व पीडब्लुडी विभाग द्वारा ठीकेदारी के माध्यम से सुन्दरी करण चौड़ीकरण व दो भागो में बांटकर डिवाइडर निर्माण के समय ही इस चौराहा का अस्तित्व को लगभग समाप्त कर दिया गया। व्यापारियों के कड़े विरोध के चलते रेलवे स्टेशन व पुराने बर्फ़ फैक्ट्री के  पास कट जरूर दिया गया किंतु सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए व तथाकथित पत्रकार के काना फूसी से वह भी अब बंद कर दिया गया है। इस प्यारेलाल चौराहे पर गोलंबर बनाकर बना है जो कि किसी काम का नही  इसका अस्तित्व पुन: वापस लाने के लिए पिछले महीनें प्यारे लाल चौराहा बचाओ के लिए व्यापारियों द्वारा  जिलाधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार जनों को  पत्रक देकर अवगत कराते हुए  संघर्ष का विगुल जरूर फुंका किंतु अभी तक कोई विशेष इस पर जनप्रतिनिधि तो जनप्रतिनिधि आला अधिकारी राजनितिक खेल में अपना श्रेय आगे लोगो के समस्या का समाधान नहीं किया जिससे इसे  आज तक कामयाबी हाथ नही लग सकी है।आमजन व व्यापारियों की समस्याओं को संज्ञान में लेने का इस चौराहे के लिए डीएम का पत्र भी दिया गया किंतु शासन-प्रशासन द्वारा अभी तक इस सुंदरीकरण कार्य की दिशा में धरातल पर कोई भी पहल नहीं किए जाने से व्यापारियों के साथ-साथ आम जनमानस में भी प्रशासन व राजनीतिक नेताओं के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है जो आने वाले दिनों आंदोलन का रूप अख्तियार कर ले तो बड़ी बात नहीं होगी।

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