महर्षि टाइम्स
रसडा (बलिया) चैत्र मास, नवप्रदिपदा अष्टमी तिथि शनिवार को नवरात्रि के पर्व पर प्राचीन मां काली मंदिर पर श्रद्धालु भक्तो का पुजन अर्चन के सुबह से ही विशेष कर ताता लगा रहा लोग माता टेककर मां से अपनी श्रद्धा अनुसार व्रत रहकर व अन्य तरह के श्रद्धालु प्रसाद व चढ़ावा चढ़कर मां से मन्नते व कामना करते है मां कृपा होती है तदैव उनकी कामना अवश्य पूर्ण होती है ऐसा इस माता काली मंदिर की मां काली की श्रद्धालु जनो से सुना जाता है जिससे इस मंदिर पर शारदीय नवरात्रि व वसंत नवरात्रि पर श्रद्धालु भक्तो का भीड लग जाती है जो देखने को मिल रहा है बताते है किंवदन्ति कहा जाता है की मां की श्रंगार में मां नाक की सोने के नथनी चोरी करने के लिए चोर आया और चोरी कर जाने लगा मंदिर से ज्यों बाहर निकाला अंधा हो गया। न दिखने से रोने चिल्लाने लगा जिससे पकड़ा गया उससे नथनी लेकर, वहां उपस्थित लोग उसे छोड़ दिया इसी तरह एक बार एक और चोर आया वह मां से कहकर की मां आज मै आपकी सोने की नथिया चोरी कर अपने परिवार का भोजन करने पेट भरने के लिए चोरी कर रहा हूं भूखा नही रहा जा रहा है। जिससे मां उसे चोरी करने से मना नहीं की और उससे कही जा लेजा आज से भूखा नही रहेगा तब चोर मां की नथिया चोरी नही किया और चरणो गिर, गिलगिलाते हुए क्षमा करने की याचना करने लगा जिसे मा क्षमा कर दी। इस प्रकार वह मां का नित्य मंदिर पर रहकर साफ सफाई पुजा सेवा करने लगा सुखमय जीवन जीवन व्यतित करने लगा मां की महिमा का गुण गाते हुए मां की बखान करने से नही अघाता तब से यह मंदिर नगर के पूरब दक्षिण कोटवारी व प्रधान पुर मार्ग पर अवस्थित है लोग श्रद्धा से अपने मन्नते कामना के लिए आते है और खुशी खुशी जाते है इस प्राचीन मंदिर को जीर्णोद्धार नव निर्माण में मंदिर से पश्चिम नगर निवासी रामचन्द्र सिंह उर्फ ध्रुव सिंह ने मंदिर की भव्यता में पूर्ण सहयोग की जिससे मां मंदिर पर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रो व दूर दराज के लोग पुजा दर्शन करने आते है नवरात्रि में मां के दरबार मंदिर पर भव्य मेला भी लगता है जिससे नवरात्रि के अष्टमी को श्रद्धालु भक्तो की पुजा अर्चना चढ़ावा के लिए अधिक संख्या में लोगो के उमड़ी भीड़ का ताता लगा रहा नवरात्रि के संध्या वेला पर मां के आरती के समय ओम प्रकाश वर्मा, अनील, अमर, ललित सिंह, सर्वेन्दर उपाध्याय, उदित वर्मा, अशोक कुमार; निर्मल बाबा जय प्रकाश, रवि सोनू मंगल सिंह रवीन्द्रनाथ, आदि रहे।

