जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण द्वारा लू (हीट वेव) के दृष्टिगत एडवाइजरी जारी

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लू (हीट वेव) : क्या करें/क्या न करें

महर्षि टाइम्स 

बलिया। हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है। तत्काल उचित उपचार उपलब्ध न होने की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। हीट वेव के प्रभावों को कम करने के लिए निम्न तथ्यों पर ध्यान देना चाहिये :

 *क्या करें* 

* सावधान रहें

* हीट वेव/लू के सम्बन्ध में प्रचार माध्यमों से जारी की जा रही चेतावनी पर ध्यान दें।

* हीट स्ट्रोक, हीट रैश, हीट क्रैम्प के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचानें।

* कमजोरी अथवा मूर्छा जैसी स्थिति का अनुभव होने पर तत्काल चिकित्सीय सलाह लें।

* हाइड्रेटेड रहें (शरीर में जल की कमी से बचाव)

* अधिक से अधिक पानी पियें, यदि प्यास न लगी हो तब भी।

* यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ अवश्य ले जाएं।

* ओ०आर०एस०, घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़), नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें, जिससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके।

* जल की अधिक मात्रा वाले मौसमी फल एवं सब्जियों का प्रयोग करें यथा तरबूजा खरबूज संतरे अंगूर अन्नास खीरा ककड़ी, सलाद पत्ता (लेट्यूस)

* शरीर को ढक कर रखें

* हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें।

* धूप के चश्में, छाता, टोपी, व चप्पल का प्रयोग करें।

* अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ पैरों को गीले कपड़ें से ढके रहें तथा छाते का प्रयोग करें।

* यथासंभव अधिक से अधिक अवधि के लिए घर कार्यालय इत्यादि के अंदर रहें

* उचित वायु संचरण वाले शीतल स्थानों पर रहें।

* सूर्य की सीधी रोशनी तथा ऊष्ण हवा को रोकने हेतु उचित प्रबंध करें। अपने घरों को ठण्डा रखें, दिन में खिड़कियां, पर्दे तथा दरवाजे बंद रखें,विशेषकर घर तथा कार्यालय के उन क्षेत्रों में जहाँ सूरज की सीधी रौशनी पड़ती हो। शाम/रात के समय घर तथा कमरों को ठण्डा करने हेतु इन्हें खोल दें।

* घर से बाहर होने की स्थिति में आराम करने की समयावधि तथा आवृत्ति को बढायें।

* पंखे, गीले कपड़ों का उपयोग करें।

* जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें तथा उन्हें पर्याप्त पानी पीने को दें।

 *अन्य सावधानियां* 

* ऐसे बुजुर्ग तथा बीमार व्यक्ति जो एकांतवास करते हों, के स्वास्थ्य की नियमित रूप से देखभाल तथा समीक्षा की जानी चाहिए।

* दिन के समय में अपने घर के निचले तल पर प्रवास का प्रयास करें

* शरीर के तापमान को कम रखने के लिए पंखे, गीले कपड़े इत्यादि का प्रयोग करें।

 *क्या न करें* 

* अधिक गर्मी वाले समय में, विशेषकर दोपहर 12 से 03 बजे के मध्य, सूर्य की सीधी रोशनी में जाने से बचें।

* नंगे पैर बाहर न निकलें।

* अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के प्रयोग से यथासंभव बचें तथा बासी भोजन का प्रयोग न करें।

* बच्चों तथा पालतू जानवरों को खड़ी गाडियों में न छोड़े।

* गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें।

* जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें।

* अधिक गर्मी वाले समय में खाना बनाने से बचें, रसोई वाले स्थान को ठण्डा करने के लिये दरवाजे तथा खिड़कियां खोल दें।

* शराब, चाय, काफी, कार्बोनेटेड साफ्ट ड्रिंक आदि के उपयोग करने से बचें, क्योंकि यह शरीर में निर्जलीकरण करते हैं।

 *नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों के लिए निर्देश* 

* कार्यस्थल पर शीतल पेयजल की व्यवस्था करें तथा कर्मियों को प्रत्येक 20 मिनट की अवधि पर जल का सेवन करने के लिए कहें ताकि उनके शरीर में जल की कमी न हो।

* कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें।

* कर्मियों हेतु छायादार कार्यस्थलों का प्रबंध करें, इस हेतु कार्य स्थल पर अस्थाई शेल्टर का निर्माण किया जा सकता है।

* अधिक श्रमसाध्य तथा बाह्य वातावरण में किए जाने वाले कार्यों को दिन के ठंडे समय पर किए जाने हेतु प्रबंध करें, जैसे सुबह अथवा शाम के समय। बाह्य वातावरण में किये जाने वाले कार्य हेतु विश्राम की अवधि तथा आवृत्ति को बढ़ाएं। प्रत्येक घंटे के श्रमसाध्य कार्य के उपरान्त न्यूनतम 5 मिनट का विश्राम दिया जा सकता है।

* तापमान के अधिक होने पर कर्मियों की संख्या बढ़ायें अथवा कार्य की गति को धीमा करें।

* अधिक तापमान के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य स्थितियों के लक्षणों तथा अधिक तापमान से संबंधित रोगों के खतरों को बढ़ाने वाले कारकों को पहचानने हेतु कर्मियों को प्रशिक्षित करें। 

* कार्यस्थल पर प्रशिक्षित प्राथमिक सहायता कर्मी (फर्स्ट ऐड वर्कर्स) उपलब्ध होने चाहिए तथा उष्णता संबंधी बीमारियों की स्थिति के लिए 'इमर्जेंसी रिस्पॉन्स प्लान' तैयार होना चाहिए।

* गर्भवती महिलाओं तथा पहले से बीमार व्यक्तियों को अधिक तापमान की स्थिति में कार्य करने के विषय में अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

* यदि कर्मी बाह्य वातावरण में काम कर रहे हों तो हल्के रंग के कपड़ों का प्रयोग करें। उचित होगा कि पूरी बाजू की कमीज तथा पूरी लंबाई की पेंट का प्रयोग किया जाए एवं सिर को ढक कर रखा जाए,ताकि सूर्य की रौशनी के सीधे प्रभाव से बचा जा सके।

* कर्मियों के संवेदीकरण एवं जागरूकता उत्पन्न किए जाने हेतु आवश्यक गतिविधियाँ सुनियोजित रूप से संपादित की जायें।

* अत्यधिक तापमान के प्रभाव तथा इनसे बचाव के विषय में सूचना देने वाले पंफलेट्स का वितरण कर्मियो में किया जाना चाहिए तथा इस संबंध में प्रशिक्षण हेतु नियोक्ताओं एवं कर्मियों के प्रशिक्षण हेतु सत्र आयोजित किए जाने चाहिए।

* गर्भवती महिला कर्मियों तथा रोगग्रस्त कर्मियों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।

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