सम्मान समारोह: समर्पण और शिक्षा के प्रति नई प्रेरणा का संकल्प।

MAHARSHI TIMES
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रिपोर्ट प्रदीप कुमार पाण्डेय।

गाजीपुर। जनपद के मुहम्मदाबाद थाना अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले आचार्यों को समर्पित "आचार्य सम्मान समारोह" का आयोजन स्थानीय कोतवाली अंतर्गत अष्ट शहीद सभागार में किया गया। यह भव्य कार्यक्रम एकल अभियान के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें मोहम्मदाबाद और बाराचवर संच के आचार्य एकत्र हुए। इस अवसर पर आचार्यों ने शिक्षा एवं समाज सेवा के प्रति अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुई। सभा अध्यक्ष मीरा राय ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर और दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस आध्यात्मिक और प्रेरणादायक शुरुआत ने पूरे समारोह को एक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन कुशलता से कंचन यादव ने किया, जबकि अध्यक्षता समाजसेविका मीरा राय ने की।

इस आयोजन के दौरान गाजीपुर अंचल संभाग, पूर्वी उत्तर प्रदेश के आचार्यों की मासिक बैठक भी संपन्न हुई। बैठक में संच अध्यक्ष अमित कुमार जायसवाल ने आचार्यों को एकल अभियान की अब तक की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस अभियान के महत्व और शिक्षा क्षेत्र में इसके सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डाला।

सम्मान समारोह में सभा अध्यक्ष मीरा राय ने आचार्यों के योगदान को सराहते हुए उन्हें अंगवस्त्र और बेडशीट प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल उनके कर्तव्यों की सराहना थी, बल्कि समाज और शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा को भी मान्यता देने का एक प्रयास था।

इस अवसर पर विभिन्न गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें संभाग जागरण प्रमुख रवि कुमार मौर्य, क्षेत्रीय अभियान प्रमुख सुमन वर्मा, अंचल प्रशिक्षण प्रमुख सत्य प्रकाश उर्फ मुकेश जी, संच प्रमुख कंचन यादव और पिंकी शामिल थे।समारोह के अंत में सभा अध्यक्ष मीरा राय ने सभी उपस्थित आचार्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी।

यह कार्यक्रम न केवल आचार्यों को सम्मानित करने का एक मंच बना, बल्कि उनके भीतर शिक्षा के प्रति एक नई प्रेरणा और प्रतिबद्धता का संचार भी किया। समारोह का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जिससे आचार्यगण और उपस्थित जन समुदाय सकारात्मक ऊर्जा से भर गए।

इस तरह, "आचार्य सम्मान समारोह" न केवल एक उत्सव बना, बल्कि शिक्षा और समाज सेवा के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक मजबूत करने का माध्यम भी साबित हुआ।

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