30 श्रमिकों व तीन स्थायी कर्मचारियों का 72 लाख से अधिक है बाकी
महर्षि टाइम्स
रसड़ा बलिया 16 जनवरी वर्ष 1974 में स्थापित हुई रसड़ा की चीनी मिल के चालू होने से बलिया, गाजीपुर तथा मऊ के हजारों किसान लाभान्वित होते थे और लोगों को रोजगार भी मिला था किंतु वर्ष 2013-14 में इस मिल को आर्थिक घाटा व जर्जर दिखाकर बंद कर दिया गया। कुछ कर्मचारियों को घोसी व सठिआंव चीनी मिल में जरूर समायोजित किया गया। वैसे तो सैकड़ों श्रमिक व कर्मचारी इस मिल के बंद होने से बेरोजगार हो गए लेकिन अभी 30 अवकाश प्राप्त श्रमिकों का 60 लाख तथा तीन स्थायी कर्मचारियों का 12 लाख से अधिक का बकाया वेतन रूका हुआ है। चीनी मिल को बंद हुए 10 वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी तक इस चीनी मिल के बंद होने बाद सपा की सरकार थी किंतु इसे चालू कराने लेकर कागजी कोरम पूर्ति की कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं हो सका। इस चीनी मिल को चालू कराने को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रसड़ा के रामलीला मैदान में एक जनसभा के दौरान रसड़ा वासियों को आश्वासन तो जरूर दिया गया किंतु अब तक यह आश्वासन कोरा ही साबित हो रहा है।
चीनी मिल को चलाने को सार्थक प्रयास है जारी : बब्बन सिंह रघुवंशी, उपसभापति, चीनी मिल रसड़ा।
रसड़ा चीनी मिल को पुन: चालू कराने को लिए सार्थक प्रयास जारी है। 22 नवम्बर को बोर्ड की बैठक में इस मिल को चालू कराने का प्रस्ताव पारित कराया जा चुका है तथा मुख्यमंत्री से शीघ्र मिल लेने के बाद स्थिति और भी स्पष्ट हो जायेगी।

