सीएचसी सिकंदरपुर में खुली व्यवस्थाओं की पोल, विधायक और एसडीएम ने जताई नाराजगी

MAHARSHI TIMES
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निरीक्षण के दौरान अधीक्षक व फार्मासिस्ट की आपस की लड़ाई सामने आई स्वच्छ पानी और बैठने की सुविधा भी नदारद

रजनीश श्रीवास्तव 

सिकंदरपुर (बलिया)। - सिकंदरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक मोहम्मद रिजवी और उप जिलाधिकारी सुनील कुमार द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अव्यवस्थाओं की लंबी फेहरिस्त सामने आई। निरीक्षण के दौरान महिला वार्ड में पंखे बंद मिले, अस्पताल का आरओ प्लांट खराब मिला, मरीजों और परिजनों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं दिखी और सबसे गंभीर आरोप अधीक्षक व फार्मासिस्ट की लड़ाई सामने आई  निरीक्षण के दौरान अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट वीरेंद्र चौधरी ने विधायक और एसडीएम के सामने ही आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। यह बात सुनकर दोनों अधिकारी हैरान रह गए। वही अधीक्षक डॉक्टर दिग्विजय सिंह का आरोप था कि फार्मासिस्ट समय से उपस्थित नहीं रहते हैं स्टोर में दवा होने के बावजूद भी वह नहीं देते हैं कई महीने से मरीज के लिए दो दर्जन से अधिक नया बेड आया है लेकिन बार-बार कहने के बावजूद भी वह स्टोर में बंद कर रखे हुए हैं जिस पर उप जिलाधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि, “इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

विधायक ने दी सुविधाओं को बेहतर करने की घोषणा

अस्पताल परिसर में स्वच्छ पेयजल का इंतजाम न होना बड़ी समस्या के रूप में सामने आया। मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है क्योंकि आरओ सिस्टम खराब पड़ा है। अस्पताल परिसर में आरो का पानी बोतल में रखा हुआ था इस पर नाराजगी जताते हुए विधायक मोहम्मद रिजवी ने कहा कि वह अपनी विधायक निधि से अस्पताल में नया आरओ प्लांट लगवाएंगे। इसके अलावा, महिला वार्ड में पंखे न चलने और बिजली आपूर्ति बाधित रहने की समस्या को देखते हुए विधायक ने अस्पताल परिसर में सोलर प्लांट लगवाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा से न सिर्फ पंखे चलेंगे, बल्कि अस्पताल की अन्य मशीनें भी निर्बाध रूप से संचालित होंगी। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के बीच आपसी तालमेल की कमी है, जिसका सीधा असर मरीजों की सेवा पर पड़ रहा है। उपजिलाधिकारी ने सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा कि कर्मचारियों और चिकित्सकों को आपसी मतभेद भुलाकर एक टीम की तरह काम करना होगा। यदि यह स्थिति नहीं सुधरी तो प्रशासन सख्त कदम उठाएगा।

अस्पताल की चहारदीवारी कई जगहों से टूटी हुई पाई गई, जिससे सुरक्षा और साफ-सफाई दोनों पर खतरा बना हुआ है। वहीं सफाईकर्मियों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम बताई गई, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। विधायक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की प्राथमिक जिम्मेदारी गरीबों और ग्रामीण जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देना है। यहां मरीजों को बाहर की दवाएं लिखना, पानी-बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव और चिकित्सकों का आपसी टकराव अस्वीकार्य है।

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