महर्षि टाइम्स
नगरा(बलिया)। प्रख्यात वनखण्डी नागेश्वरनाथ महादेव मठ डूहांबिहरा में अखण्ड संगकीर्तन का आयोजन किया गया।परम्परागत तौर पर बुधवार 30 जुलाई को अखण्ड अष्टयाम संकीर्तन का शुभारम्भ किया गया, यह संकीर्तन ब्रह्मलीन सन्त-सद्गुरु स्वामी ईश्वरदास ब्रह्मचारी जी महाराज द्वारा रचित है। यथा-"मम प्राणनाथ शिव-शक्ति प्रभो, अज पार ब्रह्म अद्वैत विभो।" यहाँ हर साल सावन के महीने में धार्मिक आयोजन होते हैं, वैसे भी मनभावन सावन सबको प्रिय है।
वस्तुतः सारे ही धार्मिक महोत्सव मन, प्राण एवं शरीर के संयम को लक्ष्य कर आयोजित होते हैं क्योंकि विद्वानों ने इन तीनों के संयम को ही मोक्ष की संज्ञा दी है। तन- त्याग के बाद मोक्ष की परि-कल्पना निराधार-सी प्रतीत होती है। मृत्यु एक अनिवार्य प्रक्रिया है, महापुरुषों को भी तन त्यागना पड़ता है। हाँ, उनके आदर्श -उपदेश रह जाते हैं। हम उनके जीवन्त आदर्शों पर चलकर अपना जीवन सार्थक बनाने का प्रयास करते हैं। श्री वनखण्डी नाथ जी और श्री मौनी बाबा जी महाराज भी ऐसे ही युगपुरुष
रहे। उक्त मठ में अगले दिन कीर्तन का समापन, रुद्राभिषेक, पूजन, हवन, आरती, स्तुति तथा प्रसाद -वितरण कि या जाना है। हमें ऐसे उत्सवों में भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा अर्जित करनी चाहिए।
