“भाविहि मेटि सकहि त्रिपुरारी”
महर्षि टाइम्स चितबड़ागांव बलिया।
जीव अगर श्रद्धा विश्वास पूर्वक भगवान शंकर की उपासना करे तो शंकर भगवान विधाता द्वारा लिखे हुए भाग्य को बदल सकते हैं।
भगवान शंकर कल्याण के देवता हैं और अपने पूरे परिवार के साथ श्रीराम चन्द्र जी का भजन करते रहते हैं।जिसके परिणाम स्वरूप शिव जी का पूरा परिवार पूजनीय है।
भजन के प्रभाव से स्वाभाविक प्रतिकूल व्यवहार / विचार होते हुए भी प्रेम पूर्वक एक दूसरे के साथ रहा जा सकता है।जन कल्याण, लोक कल्याण और विश्व कल्याण की कामना से अगर भगवान शिव की पूजा की जाय तो वो हर एक कामना पूर्ण करते हैं।
अयोध्या काण्ड श्री राम चरित मानस का हृदय है।अयोध्या काण्ड श्री राम चरित मानस रूपी माला की मणि है।
अयोध्या काण्ड में व्यवहार की कथा है, प्रेम , त्याग , सेवा, समर्पण, भक्ति, कर्तव्य का अनूठा उदाहरण है अयोध्याकाण्ड।
अयोध्याकाण्ड जीवन की युवावस्था को व्यवस्थित करती है।
और अगर जीवन की युवावस्था व्यवस्थित है तो पूरा जीवन स्वतः व्यवस्थित हो जाएगा।
विधान बिगड़ने से व्यवधान प्रकट हो जाता है।और जहां सद्गुरूदेव भगवान का अपमान होता है वहाँ भगवान नहीं रहते।




