योगी से इस्तीफा मांगने वाले धूर्त को समर्पित

MAHARSHI TIMES
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महर्षि टाइम्स 

ढोंगी,खल, नादान, तुम्हारी ऐसी-तैसी,

सनातनी अपमान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


तुमको सुनकर खुद शंकर जी विचलित हैं,

फ्रॉड,अघी, बेइमान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


करपात्री की भूमि कलंकित किया कुटिल,

आदर के अवसान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


धूर्त,धतूरे, धोखेबाज,धरम के रिपु,

तट से कर प्रस्थान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


कायर,कामी,क्रूर,कुलच्छन,कुलद्रोही,

कौरव की संतान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


योगी का इस्तीफा मांग रहा है तू,

बनकर सकल सुजान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


बना शंकराचार्य 'स्वयंभू',छल-दंभी,

कर तू मुक्त जहान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


चौराहे पर लतियाया जो काशी में,

अब उसका गुणगान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


इस्तीफे की खातिर काहें भौंक रहा?

हे टीपू के श्वान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


ना तू उमा, न शंकर-सा व्यक्तित्व तेरा,

ले ले थोड़ा ज्ञान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


हे पांड़े कुल के कलंक, कलुषित कौवे,

बेल्हा के अपमान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


कांग्रेस के बोल, सपाई की भाषा,

म्लेच्छों के वरदान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


महाकुंभ यूपी-भारत का गौरव है,

महिमा तो पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


अंबानी सुत की शादी में शामिल हो,

बता दिया पहचान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


बाला साहेब सुत के घर हाजिरी लगा,

ढूंढ़ रहा भगवान? तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


है विरक्त तो राजनीति में अंगुली क्यों?

कर प्रभु का गुणगान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


कभी ठाकरे,टीपू, कभी अंबानी का,

करता गौरव गान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


गुरु का सर्टिफिकेट चुराकर पदलोलुप,

बनने चला महान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


महाकुंभ में कोटि-कोटि श्रद्धालु रुके,

ढूंढ़ रहे उन्वान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


जग में सत्य सनातन जिसने लहराया,

दो उनको सम्मान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


खुद दिन-रात बिताया तट पर जाग-जाग,

उसका यूं अपमान? तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


धर्मवीर है, कर्मवीर 'वह' यूपी का,

तिस पर कुटिल बयान! तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


होता है तू कौन सजा देने वाला?

बनकर खुद भगवान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


फ्रॉड शंकराचार्य, विपक्षी तोता तू,

बोला हिंदुस्तान, तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


गुरु का पुण्य लिए सिर पर मंडराता है,

तेरी क्या पहचान? तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


जिस दिन योगी बाबा जी की सटक गई!

होगा सकल निदान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


कवि सुरेश से पंगा ही मत लेना तू,

हे चीनी सामान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


तुझको टीपू-पप्पू लोग सुहाते हैं,

कर उनका 'लघु' पान! तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


'वेट' कर रहा है बेल्हा, दिखला जा मुंह,

करना है सम्मान! तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


बुलडोजर वाले बाबा हैं बिजी अभी,

मानो प्रभु एहसान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


महाकुंभ के बाद सिखाएंगे तुमको,

इस्तीफे का ज्ञान,तुम्हारी ऐसी-तैसी ।


 *सुरेश मिश्र* 

9869141831

यह कविता स्पष्ट रूप से एक व्यंग्यात्मक और आक्रोशपूर्ण अभिव्यक्ति है, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा मांगने वाले व्यक्ति (संभवतः किसी धार्मिक या राजनीतिक हस्ती) पर कटाक्ष करती है। इसमें कवि सुरेश मिश्र ने तीखे शब्दों और तुकबंदी के माध्यम से उस व्यक्ति की निंदा की है, जो योगी जी के इस्तीफे की मांग कर रहा है।


*कविता का सार*


*सनातन धर्म और योगी का सम्मान:*

कवि का मानना है कि योगी आदित्यनाथ केवल एक नेता ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के रक्षक हैं। इसलिए, उनके इस्तीफे की मांग करना हिंदू संस्कृति का अपमान है।


*कथित विरोधी पर कटाक्ष:*

कवि ने अपने विरोधी को "ढोंगी, खल, नादान, फ्रॉड, अघी, बेईमान" जैसे विशेषणों से संबोधित कर उसे सनातन धर्म का शत्रु बताया है। वे संकेत देते हैं कि इस व्यक्ति ने धर्म और आदर की सीमाओं को लांघ दिया है।


*राजनीतिक संदर्भ:*

कविता में बार-बार कांग्रेस, सपा (सामाजवादी पार्टी) और "टीपू के श्वान" जैसे शब्दों का प्रयोग कर यह संकेत दिया गया है कि योगी के इस्तीफे की मांग करने वाला व्यक्ति विपक्षी राजनीति से प्रेरित हो सकता है।


*धार्मिक नेतृत्व पर सवाल:*

इस कविता में एक स्वयंभू शंकराचार्य की आलोचना की गई है, जिसे कवि "छल-दंभी" और "गुरु का सर्टिफिकेट चुराने वाला" बताते हैं। उनका इशारा किसी ऐसे व्यक्ति की ओर है, जिसने बिना उचित योग्यता के स्वयं को धर्मगुरु घोषित कर दिया है।


*महाकुंभ और सनातन संस्कृति का महत्व:*

कवि का कहना है कि महाकुंभ केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक शान है। इसे लेकर किसी भी तरह की नकारात्मक टिप्पणी अनुचित है।


*बुलडोजर नीति का समर्थन:*

कविता के अंत में योगी की "बुलडोजर नीति" की सराहना की गई है और यह संकेत दिया गया है कि महाकुंभ के बाद इस कथित विरोधी को सबक सिखाया जाएगा।

यह कविता मुखरता के साथ योगी आदित्यनाथ के प्रति समर्थन और उनके विरोधियों के प्रति विरोध प्रकट करती है। इसमें कठोर शब्दावली का प्रयोग कर यह बताया गया है कि सनातन संस्कृति के रक्षक के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


 रविंद्र आर्य 7838195666

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