उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों के लिए खुशखबरी - श्रीचंद शर्मा शिक्षक विधायक

MAHARSHI TIMES
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रिपोर्ट: रविन्द्र आर्य

*उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षा मित्रों के लिए महत्वपूर्ण और खुशी की खबर लेकर आया है। इतिहास में पहली बार संविदा कर्मचारी/शिक्षक (शिक्षा मित्र) अब अपनी वरीयता के आधार पर अंतर-जिला तबादलों का लाभ उठा सकेंगे।*


"*श्री श्रीचंद शर्मा की घोषणा*"


*उत्तर प्रदेश:* मेरठ-सहारनपुर मंडल से एमएलसी (शिक्षक प्रतिनिधि) और भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक श्री श्रीचंद शर्मा ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान शिक्षा मित्र संगठन के प्रतिनिधि अपनी समस्याओं को लेकर उनके पास आए थे और अपनी मांगों को सूचीबद्ध करते हुए ज्ञापन सौंपा था।


इन मांगों में अंतर-जिला तबादलों की महत्वपूर्ण मांग थी, खासकर महिला शिक्षा मित्रों के लिए, जिन्हें शादी के बाद न्यूनतम मानदेय पर काम करते हुए दूसरे जिलों में अपने मूल विद्यालयों में जाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।


 *निर्णय की मुख्य बातें*


*अंतर-जिला स्थानांतरण को मंजूरी:*

पहली बार उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षा मित्र अपने निवास के नजदीक के विद्यालयों में स्थानांतरित हो सकेंगे, जिससे उन्हें आवागमन में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी।


*समस्याओं का समाधान:*

इस कदम से विशेष रूप से विवाहित महिला शिक्षा मित्रों को राहत मिलेगी, जो पहले अपने पैतृक घर के नजदीक के विद्यालयों में नियुक्त थीं, लेकिन अब विवाह के बाद दूर रहती हैं।

इससे उनके यात्रा व्यय और उससे जुड़ी असुविधाओं में काफी कमी आएगी।


*निर्णय के पीछे प्रयास:*

श्री शर्मा ने माननीय मुख्यमंत्री, विधान परिषद के नेता, बेसिक शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इन मुद्दों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके लगातार प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि शिक्षा मित्रों की अंतर-जिला स्थानांतरण की मांग स्वीकार कर ली गई।


*सरकार के प्रति आभार:*

शिक्षा मित्रों की ओर से श्री शर्मा ने इस निर्णय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया।

 उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही मानदेय वृद्धि और लंबित मुद्दों सहित अन्य मांगों पर भी ध्यान देगी।


*निर्णय का प्रभाव*

यह ऐतिहासिक निर्णय शिक्षामित्रों की स्थिति में सुधार लाने और उनके लिए बेहतर कार्य वातावरण बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे उनकी उत्पादकता और संतुष्टि में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे शिक्षा प्रणाली अधिक कुशल होगी।

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