जान जोखिम में डाल ट्रैक से ट्रेन की बोगी में चढ़ने को विवश है रेवती के यात्री

MAHARSHI TIMES
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चौवालिस दिनों के आंदोलन के बावजूद सरकार के कानों में नहीं रेंग रहा जूं 


संसद में आवाज उठने का हो रहा इंतजार 

रिपोर्टर /शिवसागर पाण्डेय 

 रेवती(बलिया)। जान जोखिम में डाल ट्रैक से ट्रेन की बोगी में रेवती स्टेशन से यात्री चढ़ने को विवश है।पुनः स्टेशन बहाली को लेकर आंदोलन 44 दिनो से चल रहा है।आलम यह है कि जिले के ही सांसद और प्रदेश सरकार के मंत्री को वक्त नही मिल रहा है कि आकर आंदोलनकर्ताओ से बात कर मांग को आगे बढ़ाएं।सत्ता से जुड़े कुछ नेता आए और गए किंतु मांग का मुद्दा आज भी ठोस द्रव की तरह पड़ा हुआ है।उम्मीद है कि विपक्ष यानि सपा के सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर और घोसी के सपा सांसद राजीव राय सदन में मांग को उठाएगे।रेल मंत्री का जबाब क्या होगा इस पर आंदोलन का अगला पड़ाव टिका हुआ है।यह मुद्दा इलाके के दो लाख से अधिक लोगो के यातायात सुविधा के साथ ही सन् 1942 जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो ने स्टेशन को कब्जे में लेकर रेवती में देश का पहला स्वराज्य स्थापित किया था।लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे है कि ऐसे स्टेशन का कद घटा कर रेल विभाग सेनानियो का कैसा सम्मान करना चाहती है।महात्मा गांधी के सिद्धांत पर भले देश आजाद हो गया।किंतु 44 दिनों के आंदोलन के सफर के बाद मंच से भगत सिंह,चन्द्रशेखर आजाद,अशफाक जैसे क्रांतिवीरो के सिद्धांत की वकालत लोकतंत्र की नई परिभाषा की ओर आंदोलन के बढ़ने का संकेत दे रही है।

संयोजक लक्ष्मण पाण्डेय के अनुसार 27 दिनो के भूख हड़ताल में मुन्नु कुंवर,सुरज यादव,पीयूष पाण्डेय,लक्ष्मण पाण्डेय,मुन्ना यादव,मनोज पाल,गोपाल प्रजापति,पराशर गोत्रीय सात स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से जुड़े सोमेश्वर पाण्डेय डब्लू और सत्यदेव का कुल 44 किलो वजन बलिदान हुआ है।बलिया सांसद सनातन पाण्डेय रेलवे बोर्ड में रेवती का मुद्दा रख चुके है।

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