स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगरनाथ पाण्डेय ने रेवती दह में कुद कर बृटिस फौज से बचायी थी अपनी जान

MAHARSHI TIMES
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19 दिसम्बर 1985 को हुआ था निधन,ताम्रपत्र भेट कर  पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने किया था किया था सम्मान 

महर्षि टाइम्स/रिपोर्टर शिव सागर पाण्डेय 

रेवती(बलिया)। आजादी की जंग में शामिल रहे रेवती निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगरनाथ पाण्डेय की दास्तान,वे बलिया और वाराणसी के जेल में बंद रहे।

पाण्डेय का जन्म एक जनवरी 1901 में हुआ था।ये 18 वर्ष की उम्र में कलकत्ता नौकरी के तलाश में गांव छोड़े।किंतु वहां जाकर स्थित से व्यथित होकर स्वतंत्रता संग्राम का पथ चुना।पुलिस की नजर पड़ी और मुकदमा दर्ज होने के बाद शहर छोड़ गांव लौटना पड़ा।बलिया में कांग्रेस आजादी की जंग लड़ रही थी।यहां भी पार्टी से जुड़ गतिविधियो में शामिल हो गए।नमक सत्याग्रह,विदेशी कपड़ो की होली जलाने, साइमन कमीशन का विरोध जैसे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख आंदोलन में शामिल रहे।वर्ष 1941में 121 डीआईआर 38 (5) में पकड़ कर जेल भेज दिए गए।वहां भी पटसन की ढ़ेर में आग लगा दी और काम करने से इंकार कर दिया।बलिया जेलर की संस्तुती पर वाराणसी जेल भेज दिया गया।एक वर्ष बाद जेल से आने पर 1942 में रेवती थाना,पोस्ट आफिस की आगजनी,रेललाईन उखाड़ने का मुकदमा दर्ज हुआ।जिंदा अथवा मुर्दा पकड़ने के लिए विशेष पुलिस टीम ने मौनी बाबा मंदिर पर घेराबंदी किया।किंतु रेवती दह में कुद कर गायब हो गए।इस दौरान उनकी पत्नी सुगीया देवी 9 वर्षीय बेटे सीताराम पाण्डेय को भी घर छोड़ फरार होना पड़ा था।मकान के छप्पर की कुर्की और निलामी की गयी।आजादी के 25 वें वर्षगांठ पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र प्रदान किया था।

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