महर्षि टाइम्स
बलिया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बलिया द्वारा शीतलहर से बचाव के लिए *"क्या करें, क्या न करें"* आदि के संबंध में एडवाइजरी की गई। यह जानकारी अपर जिलाधिकारी श्री डी0पी0 सिंह ने देते हुए बताया कि- शीतलहर से बचाव के लिए
*पहले*
* रेडियो सुनें, टीवी देखें, स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के लिए समाचार पत्र पढ़ें,ताकि यह पता चल सके कि क्या शीत लहर होने वाली है।
* पर्याप्त सर्दियों के कपड़े पहनें। कपड़ों की कई परतें अधिक सहायक होती हैं।
* आपातकालीन आपूर्ति तैयार रखें।
*शीतलहर के दौरान फ्लू बहती/भरी हुई नाक या नाक से खून जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है, जो आमतौर पर ठंड के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण हो जाती हैं या बढ़ जाती हैं। इस तरह के लक्षणों के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
*के दौरान*
* मौसम की जानकारी और आपातकालीन प्रक्रिया की जानकारी का बारीकी से पालन करें और सलाह के अनुसार कार्य करें।
* जितना हो सके घर के अंदर रहें और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचने के लिए कम से कम यात्रा करें।
* भारी कपड़ों की एक परत के बजाय ढीले फिटिंग, हल्के,विंड प्रूफ गर्म ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें। टाइट कपड़े ब्लड सर्कुलेशन को कम करते हैं।
* अपने आप को सूखा रखें। अपने सिर, गर्दन, हाथों और पैर की उंगलियों को पर्याप्त रूप से कवर करें, क्योंकि शरीर के इन अंगों के माध्यम से शरीर को ठंडक लगने का खतरा अधिक रहता है।
* दस्ताने पहनें, क्योंकि दस्ताने ठंडक से गर्मी और इन्सुलेशन प्रदान करते है क्योंकि उंगलियां अपनी गर्मी साझा करती है और ठंड के लिए कम सतह क्षेत्र को उजागर करती हैं।
* ठंडक से बचने के लिए टोपी और मफलर का प्रयोग करें।
* शरीर के तापमान का संतुलन बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार लें।
* पर्याप्त इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।
* नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ पिएं, क्योंकि गर्म पेय पदार्थ ठंडक से लड़ने के लिए शरीर को गर्मी करती है।
* तेल, पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से शरीर की मालिश करें, क्योंकि यह त्वचा को नमी प्रदान करते है।
* बुजुर्ग लोगों और बच्चों की देखभाल करें और अकेले रहने वाले पड़ोसियों का ख्याल रखें।
* आवश्यकता के अनुसार आवश्यक आपूर्ति स्टोर करें।
* गैर-औद्योगिक इमारतों के लिए गर्मी इन्सुलेशन गाइडलाइन का पालन करें और आवश्यक तैयारी की उपाय करें।
* शीतलहर के सम्पर्क में आने पर हाथ पैर की उंगलियों, कानों और नाक की नोक पर सुन्नता, सफेद या पीलापन दिखना, शीतलहर के लक्षण है, जिसके प्रति सतर्क रहें। तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।
* कंपकंपी को नजरअंदाज न करें। शीतलहर के प्रभाव का यह एक महत्वपूर्ण संकेत है शरीर गर्मी खो रहा हो तो जल्द से जल्द घर के अंदर गर्म स्थान पर रहने का प्रयत्न करें।
* फ्रॉस्टबाइट/हाइपोथर्मिया से पीड़ित कोई व्यक्ति शरीर के तापमान में कमी के कारण कपकंपी, बोलने में कठिनाई, नींद न आना, मांसपेशियों में अकड़न, भारी श्वास, कमजोरी और चेतना का नुकसान हो सकता है। हाइपोथर्मिया एक आपातकालीन चिकित्सा है, जिसके लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
* गर्मी उत्पन्न करने के लिये बंद कमरे के अन्दर कोयला/अंगीठी न जलायें क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न हो सकती है जो बहुत जहरीली होती है और कमरे में मौजूद लोगों की जान जा सकती है।
* विभिन्न बीमारियों, बहती/भरी हुई नाक जैसे लक्षणों के लिए तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
* पालतू जानवरों को शीतलहर से बचाने के लिए जानवरों को बाड़े के अंदर ले जाएं एवं ख्याल रखें।
एनडीएमए द्वारा जारी किया गया मोबाइल एप यथा (First Aid for Students and Teachers) FAST and SACHET मोबाइल एप डाउनलोड करें।
*हाइपोथर्मिया के मामले मेंः*
*क्या करें*
* व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाएं और उसके गीले कपड़े बदलें।
* व्यक्ति के शरीर को त्वचा से त्वचा के संपर्क में लाकर गर्म रखें, कंबल, कपड़े, तौलिये या चादर की परतों से सुखाये।
* शरीर के तापमान को बढ़ाने में मदद करने के लिए गर्म पेय दें। शराब न दें।
* स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सीय सहायता लें।
*क्या न करें*
* लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से बचें।
* शराब न पिए क्योंकि यह शरीर के तापमान को कम करती है; और रक्त वाहिकाओं को संकुचित् करती है।
* ठंढे से प्रभावित अंग की मालिश न करें। इससे अधिक नुकसान हो सकता है।
* कपकंपी को नजरअंदाज न करें। यह पहला संकेत है कि शरीर गर्मी खो रहा है-घर के अंदर शरण लें।
* प्रभावित व्यक्ति को तब तक कोई तरल पदार्थ न दें जब तक कि पूरी तरह से सचेत न हो जाए।
