प्रदीप कुमार पाण्डेय।
गाजीपुर। जनपद के नगर पालिका मुहम्मदाबाद क्षेत्र के अंतर्गत संचालित राजकीय महिला चिकित्सालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। इस बार आरोपों का केंद्र हैं—चिकित्सालय की महिला चिकित्सक डॉ. सपना यादव, जिनके व्यवहार और कार्यशैली को लेकर मरीजों और अस्पताल स्टाफ में जबरदस्त असंतोष व्याप्त है।
सूत्रों की मानें तो डॉ. यादव का अस्पताल में उपस्थिति का कोई निश्चित समय नहीं होता। वे अक्सर समय पर नहीं आतीं और अधिकांश दिनों में केवल एक या दो घंटे ही कार्य करती हैं। इस लापरवाही से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जो खासकर भीषण गर्मी और हीट वेव के बीच ग्रामीण इलाकों से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाली महिलाओं के लिए बेहद कष्टकारी हो जाता है।
अस्पताल स्टाफ का आरोप है कि डॉ. यादव का रवैया न केवल मरीजों बल्कि स्टाफ के प्रति भी अपमानजनक और रूखा रहता है। कई बार जब स्टाफ सदस्य उनकी अनुपस्थिति या किसी मरीज की स्थिति को लेकर बात करना चाहते हैं, तो उन्हें अपशब्द सुनने पड़ते हैं। इस वजह से अस्पताल का वातावरण बेहद तनावपूर्ण और असहज हो गया है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आशीष राय ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जो डॉ. यादव के कार्य व्यवहार और उपस्थिति की विस्तृत जांच करेगी।
इस बीच, मरीजों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी डॉ. हर्षिता तिवारी ने महिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मरीजों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
इस प्रकरण ने न केवल मरीजों को निराश किया है, बल्कि क्षेत्रीय जनता और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी फैला दी है। उनका कहना है कि जब एक सरकारी अस्पताल, खासकर महिला चिकित्सालय जैसी महत्वपूर्ण संस्था में डॉक्टर ही अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर न हो, तो यह सीधे-सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की विफलता है। लोगों ने मांग की है कि दोषी चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई हो और अस्पताल में नियमित, जिम्मेदार एवं संवेदनशील चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस प्रकरण में कितनी निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।

