खाद बीज के दुकानों पर किसानों का शोषण, अधिकारी मौन

MAHARSHI TIMES
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रिपोर्ट ललन बाग़ी 

रसड़ा(बलिया )। कृषि प्रधान देश भारत में 70 प्रतिशत किसानी पर निर्भर देश में किसानो का अपेक्षा गलत व फर्किजी किस्म के किसान,इसको लेकर राजनीति करते और अपना लीटर सेकते है वही अन्य राजनितिक दल पार्टियां किसानों को लेकर   राजनीति होती है।  किसानो की समस्याओं पर सदन में चर्चा होती है किसान अपनी समस्याओं को लेकर अनशन करते हैं प्रदर्शन करते हैं। किसानो की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार योजना बनाती है लेकिन सारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जाती है। किसान पशु पक्षी जीव जंतु सभी प्रकार के प्राणी मनुष्य सबके पेट भरने का काम करता है लेकिन  उसका चारों तरफ शोषण व धोखा मिलता है ।देखा जाए तो किसान प्राकृतिक आपदाओं से जूझता ही है। लेकिन सरकार की योजना  सरकारी विभाग के, सरकारी कृषि विभाग और बजार में प्राइवेट बाजार के  खाद बीज की दुकानों पर भी किसानो को शोषण का शिकार होना पड़ता है।

 इस समयानुसार या वर्तमान समय में रवि की बुवाई का समय चल रहा है खाद बीज की किल्लत,खाद बीज की अभाव  से किसान परेशान है कुछ खाद जिस में डीएपी बाजार में मिल नहीं रही है। वही सरकारी गोदाम का बहुत बुरा हाल है क्षेत्र के किसान को जब पता चलता है कि डीएपी खाद आई  है और जब किसान जाते है तब पता चलता है कि डीएपी समाप्त हो गई है जिससे लगता है। 

 होकर बाजारू दुकान से लेने पर मजबूर है। और यहां के दुकानों का यह हाल कि जो डीएपी ₹1350 की खुदरा मूल्य है उसे ₹1500 , ₹1600 मे एनपी के एस ₹1200 की जगह ₹1400,₹1500, यूरिया ₹300 खरीदने को मजबूर है खाद बीज के दुकानदार मानक से अधिक मूल्य यानी ब्लैक में किसानों को बेच रहे हैं और किसानों को दुकानदार पक्की बिल भी नहीं देते खाद बीज की प्रमाणिकता क्या है किसानों को पता नहीं नकली बीज मिलावटी खाद लेकर किसान जाते हैं बुवाई करते हैं फसल पर क्या प्रभाव पड़ेगा क्या नहीं यह तो उपज के बाद ही पता चलेगा सारे खाद बीज खुदरा मूल्य से अधिक दर पर किसान खरीद रहे। संबंधित अधिकारी मौन है कृषि अधिकारी हो उपजिलाधिकारी हो जिलाधिकारी कोई अधिकारी बंजारों दुकानों की जांच नहीं करता। विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है की जांच के लिए कोई अधिकारी जाता है तो दुकानदारों से किसानों को लूटने का सौदा तय कर लेता है और दुकानदार निडर होकर किसानों का शोषण करते हैं। देश प्रदेश की सरकार अपने अच्छे शासन का गुणगान कर रही है। पर जमीनी स्तर पर शासन की गुणवत्ता भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई भ्रष्टाचार पर सरकार का नियंत्रण नहीं है इसलिए हर जगह हर विभाग में रिश्वतखोरी का बोलबाला है ऐसे में सरकार को चाहिए की लखनऊ की स्पेशल टीम आकर बाजार में हो रहे किसानों के शोषण की जांच करें दोषी व्यक्ति पर कठोर कार्रवाई करें ताकि किसानों का नागरिकों का क्षेत्र में शोषण बंद हो।

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